फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hapur News: अधिकारियों ने खंगाले 220 करोड़ के घोटाले से जुड़े दस्तावेज

Tue, 01 Oct 2024 10:39 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
विज्ञापन
विज्ञापन
हापुड़। 220 करोड़ के नलकूप बिल घोटाले से बिगड़े लेजरों को ठीक करने की कवायद शुरू हो गई है। मंगलवार को निदेशक वाणिज्य, मुख्य अभियंता समेत निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम हापुड़ पहुंची। करीब चार घंटे तक सर्किल कार्यालय में अहम दस्तावेज खंगाले गए। किसानों का पक्ष सुना गया और कुछ पुरानी रसीदें भी तलब की।
विज्ञापन

दरअसल, करीब 20 साल पहले यह घोटाला हुआ था। लेकिन घपले की धनराशि को किसानों के बिलों में जोड़ दिया गया। पिछले दिनों जिला मुख्यालय पर किसानों ने सात दिन तक धरना प्रदर्शन कर, बिलों से इस फर्जी बकायेदारी को हटाने की मांग उठाई थी। ऊर्जा निगम के अफसरों ने 15 अक्तूबर तक समाधान का आश्वासन दिया था।

मंगलवार को ऊर्जा निगम के वाणिज्य निदेशक संजय जैन, मुख्य अभियंता राजीव अग्रवाल समेत अधिशासी अभियंताओं की टीम ने सर्किल कार्यालय में इस पूरे प्रकरण पर चर्चा की। पूर्व में एमडी कार्यालय की टीम घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज को अपने साथ ले गई थी, इस पर भी फीडबैक लिया गया। करीब चार घंटे तक पूरे प्रकरण पर गहनता से विचार किया गया।
विज्ञापन


टीम में आए कुछ अधिकारियों ने बताया कि बिगड़े बिल संशोधित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उच्चस्तरीय अधिकारी अब पूरे मामले से जुड़ गए हैं, जल्द ही किसानों को इसमें बड़ी राहत मिल सकती है।



भाकियू जिलाध्यक्ष ने रखी समस्या

सर्किल कार्यालय में आई टीम ने भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष पवन हूण समेत कई पदाधिकारियों को बुलाया। किसानों को इस प्रकरण की जितनी जानकारी थी, उनसे ली गई। कुछ पुरानी रसीदों पर भी चर्चा हुई। पवन हूण ने बाहर आकर बताया कि बिल संशोधन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, अब जिले के हजारों किसानों को गलत बिलों से राहत मिलेगी। इस मौके पर कटार सिंह, लीले प्रधान, नरेश नागर, अनिल हूण भी मौजूद रहे।



यह था मामला-

वर्ष 2004 से पहले ऊर्जा निगम के कर्मचारियों ने किसानों से नलकूप बिलों का पैसा वसूला, लेकिन राजस्व कोष में पैसा जमा नहीं किया। किसानों को रसीदें ऐसे ही थमा दी गई। पुराने रिकॉर्ड को घोटालेबाजों ने नालों में बहा दिया था, उस समय कुछ रिकॉर्ड नाले से निकाला भी गया था। इसके बाद ओटीएस में दी छूट का पैसा फिर से किसानों के खातों में चार्ज हुआ। जिस कारण इस घोटाले की राशि ब्याज समेत बढ़कर अब 1200 करोड़ के पार पहुंच गई है। समय समय पर जांच करने आयी टीमों को कभी पूरे दस्तावेज ही नहीं मिल सके। जिस कारण दो दशक से यह मामला लंबित है।



कोट -

नलकूप बिलों में गड़बड़ी के मामले में किसान संगठनों के पदाधिकारियों से वार्ता की गई है, उनका पक्ष सुना गया है। किसानों को जल्द राहत दिलाने की तैयारी है। - राजीव अग्रवाल, मुख्य अभियंता।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें