मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आंख गंवाने वाले नौ मरीजों से मिले बिना सीएमओ की ओर से गठित टीम ने हवाई रिपोर्ट तैयार कर दी हैं। यहीं नहीं रिपोर्ट पर मरीजों के हस्ताक्षर हैं।
उधर, मरीजों का कहना है कि उनसे कोई भी डॉक्टर नहीं मिला है और न ही उन्होंने किसी कागज में हस्ताक्षर किए हैं। जबकि डॉक्टर सोमवार को मरीजों से मिलने का दावा कर रहे हैं, उस दिन सात में से छह मरीज एम्स में जांच कराने गए थे।
मरीजों का कहना है कि उनके पास सिर्फ कॉल आई थी, डॉक्टरों ने मुलाकात नहीं की है। ज्ञात हो कि पांच नवंबर को मोदीनगर के एक चैरिटेबल अस्पताल के डॉक्टरों ने नगर के स्वर्ग आश्रम रोड के एक अस्पताल में कैंप लगाकर हापुड़, संभल और मोदीनगर के नौ मरीजों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए चिन्हित किया था।
ऑपरेशन के बाद इन मरीजों की एक-एक आंख की रोशनी चली गई थी। करीब एक माह बाद चेते स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ ने नेत्र सृजन के नेतृत्व में एक टीम का गठन मरीजों की जांच के लिए किया।
सोमवार को नेत्र सृजन के नेतृत्व में स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीजों की देखरेख के संबंध में एक रिपोर्ट तैयार कर आला अफसरों को सौंप दी। रिपोर्ट में मरीजों के हस्ताक्षर भी अंकित हैं। जबकि सोमवार को सात में से छह मरीज आंख दिखाने दिल्ली के एम्स गए थे।
ऐसे में स्वास्थ्य अफसरों ने मरीजों का चेकअप कैसे किया और रिपोर्ट पर मरीजों के हस्ताक्षर कैसे हो गए। कोटला मेवतियान निवासी मरीज फरजाना ने बताया कि वह और बाकी मरीज सोमवार को दिल्ली एम्स गए थे। चिकित्सकों ने उनसे फोन पर ही संपर्क किया था। कोई चिकित्सक नहीं मिला और न ही उन्होंने कोई हस्ताक्षर किया है।
सोमवार को मेरे पास एक डॉक्टर का फोन आया था। तब मैं एम्स में थी। मेरी आंखों का चेकअप नहीं किसी सरकारी डॉक्टर नहीं किया देखा और न ही मैंने किसी कागज पर हस्ताक्षर किए हैं।- फरजाना, कोटला मेवतियान
स्वास्थ्य अफसर ने सिर्फ फोन पर ही संपर्क किया था। घर पर कोई चिकित्सक नहीं आया और न ही आंखों की जांच हुई। मैंने कहीं हस्ताक्षर नहीं किए।- राजेंद्री, जसरूप नगर