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कैंसर से रिटायर्ड बिजलीकर्मी और किसान ने तोड़ा दम

Tue, 10 May 2016 12:41 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, गढ़मुक्तेश्वर
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कैंसर - फोटो : अमर उजाला
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गंगा किनारे स्थित तीन दर्जन से अधिक गांवों का दूषित भूजल पीने से लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। अब एक रिटायर्ड बिजली कर्मी और किसान की कैंसर से मौत हो गई। एक माह के भीतर बारहवीं मौत होने से ग्रामीणों में दहशत है। उनका आरोप है कि सब कुछ जानते हुए भी प्रदूषण नियंत्रण महकमा और स्वास्थ्य विभाग ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
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ग्रामीणों के मुताबिक मोक्ष दायिनी गंगा नदी के किनारे बसे करीब तीन दर्जनों गांवों का भूजल दूषित हो चुका है। गढ़-ब्रजघाट तीर्थनगरी का पानी भी पीने लायक नहीं बचा है। हेपेटाइटिस बी और सी ग्रामीणों की मौत हो रही है। रविवार रात भी गढ़ कस्बे में रिटायर्ड बिजली कर्मी सोहन लाल 62 और किसान ओमी सैनी 70 की कैंसर से मौत हो गई।

बिजली दफ्तर में कार्यरत अनिल कुमार ने बताया कि उनके पिता सोहनलाल का करीब पांच माह से नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में इलाज चल रहा था। वहीं रामवीर सैनी ने बताया कि उसके पिता ओमी सैनी को मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा के बाद दिल्ली के अस्पताल की दवा दी जा रही थी।
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बता दें कि एक माह के भीतर कैंसर से यह बारहवीं मौत है। इससे पहले गांव सलोनी में कैंसर से भाजपा मंडलाध्यक्ष अजयपाल सिंह के छोटे भाई ओमपाल सिंह, सलोनी मंढैया में करनसिंह की पत्नी विद्या, मजदूर महेंद्र सिंह, मुक्तेश्वरा में किसान रामकिशन, बक्सर में रफीक खां की बेटी गुलशन, न्याजपुर खैया में रणपाल की मौत हो चुकी है।

इन गांवों का भूजल सबसे अधिक दूषित
गढ़ और बहादुरगढ़ समेत सिंभावली क्षेत्र के अधिकांश गांवों का भूजल दूषित होता जा रहा है। जिन गांवों का भूजल सर्वाधिक दूषित हो चुका है उनमें सेहल, भद्स्याना, आलमनगर, चांदनेर, जखैड़ा रहमतपुर, पलवाड़ा, पसवाड़ा, मुहम्मदपुर, रहरवा, क्रियावली, शकराटीला, भैना, सदरपुर, लहडरा, हशूपुर, वैट, फुलड़ी, दरियापुर, बलवापुर, पूठ, सलोनी, बक्सर शामिल हैं।

एक साल में सौ से अधिक जानें गईं
भूजल दूषित होने से एक साल के भीतर महिलाओं समेत सौ से भी अधिक जाने जा चुकी हैं। इनमें जयवती, मंजू, सुनहरी हरगुलाल, लख्मीचंद, झमेल सिंह, राजेन्द्र, नेत्रपाल, यामीन, शेरसिंह, परशुराम, रामवीर, प्रेमसिंह, बनवारी, पुष्पेन्द्र, कृष्णवी, भोपाल, रमजान, फकीरा, सत्तार, रामसिंह, समयसिंह, कहल सिंह, संजीव, कल्लो, वीरवती शामिल हैं, जबकि वर्तमान में भी कई दर्जन ग्रामीण कैंसर से पीड़ित हैं।

स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ गुस्सा
ग्रामीणों का आरोप है कि एक वर्ष के भीतर कैंसर से सौ से अधिक की मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग आज तक नहीं चेता है। अधिकांश प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर कभी कभार रोगियों का परीक्षण और दूषित हो रहे भूजल की जांच पड़ताल तो कर ली जाती ह।
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