आम आदमी अभी नए-पुराने नोटों के झंझट से उबर भी नहीं पाया है कि गेहूं की कालाबाजारी के चलते थाली की रोटी पर महंगाई की नजर पड़ गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि व्यापारी किसानों से कम कीमत पर गेहूं खरीदने के बाद भी
आटा मिल मालिकों को ऊंची कीमत पर सप्लाई कर रहे हैं, जिससे आटा 24 रुपये किलो बिकने लगा है। हालांकि, प्रशासन कालाबाजारी के खिलाफ अभियान चलाने से कतारा रहा है।
बता दें कि अभी आम आदमी नए-पुराने नोट के फेर में फंसा है।
सबकी जेब खाली है। ऐसे में कालाबाजारी करने वाले मौके का फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। इसी का परिणाम है कि शुक्रवार को आटा 24 रुपये किलो बिकने लगा। जबकि किसान को बाजार में गेहूं लाने पर उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
व्यापारी किसान से गेहूं 1900 से 2000 रुपये क्विंटल तक खरीद रहे हैं। उसमें भी किसान को पुराने नोट लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जबकि आटा मिलों पर गेहूं की कीमत शुक्रवार को 2300 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया।
गेहूं व्यापारी राजेंद्र आड़ वालों का कहना है कि दो तीन दिनों में 300 रुपये क्विंटल की तेजी आई है। इस तेजी का परिणाम है कि गेहूं का आटा फुटकर में 24 रुपये किलो बिकने लगा है।
जबकि ब्रांडडे आटा 10 किलो के पैक में बुधवार तक 260 रुपये का बिक रहा था जो बृहस्पतिवार को 300 रुपये का हो गया है। रसूलपुर गांव के किसान सत्येन्द्र सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री ने नोट बंदी का निर्णय जल्दबाजी में लिया है।
इसका खामियाजा किसानों को अपनी फसल मंदा बेचकर चुकाना पड़ रहा है। वहीं, सब्जी मंडी में किसान की बंद गोभी का भाव 700 रुपये से गिरकर 250 रुपये प्रति कट्टा रह गया है।
एक कट्टे में लगभग 40 किलो गोभी आती है। इसी तरह, शीतगृहों में रखे पुराने आलू के ग्राहक खोजे से नहीं मिल रहे। 15 दिन पहले तक 600 रुपये का बिकने वाला आलू का कट्टा अब 350 रुपये मे भी बिकना मुश्किल हो रहा है।
इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी आर एन यादव से बात की गयी तो उनका कहना था कि वह तो सिर्फ राशन का खाद्य देखते हैं जबकि एसडीएम मीनू राणा का कहना था कि इस मामले को एडीएम देखेंगे। हालांकि एडीएम से संपर्क नहीं हो सका।