प्रत्याशियों की हालत आजकल बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना जैसी हो गई है। जो नेता बार-बार बुलाने पर भी शादी विवाहों में व्यस्तता बताकर जाने से कतराते थे, आज वह बिना बुलाए शादियों में शरीक हो रहे हैं। इतना ही नहीं वह घर परिवार और रिश्तेदारों से ज्यादा सक्रिय भी नजर आ रहे हैं।
शादियों में जाने से उनके प्रचार के साथ-साथ जनसंपर्क भी तेजी से हो रहा है। इन दिनों शादी का मौसम शुरू हो गया है। उम्मीदवार इन मांगलिक समारोहों का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। किसी के यहां तिलक हो या शादी, आशीर्वाद समारोह का उन्हें पता लगते ही वह समर्थकों के साथ तुरंत वहां पहुंच जा रहे हैं।
आलम यह है कि अगर प्रचार करते-करते उन्हें पता चला कि गांव या मोहल्ले में किसी की शादी हो रही है तो वह बधाई देने के लिए तुरंत पहुंच जा रहे हैं और ऐसी सक्रियता दिखा रहे हैं कि मानो उनके ही घर में शादी हो।
विवाह समारोह जाति बिरादरी के वोट पक्के करने का एक अच्छा जरिया बन गया है। जिले में आयोजित विवाह समारोह में सभी दलों के प्रत्याशी समय से पहुंच रहें हैं ताकि एक खास बिरादरी के लोगों से विवाह समारोह में भेंट कर अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर सकें।
आलम यह है कि अलग अलग स्थानों पर खड़े होकर वह अपने दल और अपनी खासियत व चुनावी वादों को बताने में पीछे नहीं हट रहे हैं। शादी में पहुंचकर लोगों से संपर्क करने का फार्मूला उम्मीदवारों के लिए कितना कारगर है, यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन प्रत्याशी ऐसे मौकों को भुनाने में कोई चूक नहीं करना चाहते।