एनजीटी द्वारा कराई जा रही सीबीआई जांच में कई अफसर घेरे में आ सकते हैं। गंगा की सफाई से जुड़ी सीवरेज और एसटीपी योजना में बड़े स्तर पर लापरवाही होने से 6 साल बाद भी लाखों लीटर दूषित पानी धड़ल्ले से गंगा में गिरकर जलधारा को निर्मल और अविरल बनाने की मंशा पर पानी फेर रहा है।
बता दें कि जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ ने गढ़-ब्रजघाट से जुड़ी करीब साढ़े 46 करोड़ वाली सीवरेज और एसटीपी योजना के चालू होने में देरी होने पर कड़ा रुख अखत्यार किया है।
इसके चलते एनजीटी इस मामले को लेकर सीबीआई जांच करा रही है। दरअसल एनजीटी इससे सख्त नाराज है कि केंद्र सरकार से जुड़ी साढे़ 46 करोड़ रुपये वाली सीवरेज और एसटीपी योजना 6 साल बाद भी चालू नहीं हो पाई है।
इससे गढ़-ब्रजघाट की आबादी का दूषित पानी बेरोकटोक गंगा में गिरकर जलधारा को दूषित कर रहा है। प्रधान पीठ ने ब्रजघाट स्थित तीन एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी को बिना देरी शुरू कराने और गढ़ के प्रत्येक घर को सीवर लाइन से जोड़ने के साथ ही
गढ़ से होकर नयाबांस के पास गंगा में गिर रहे नाले के अपशिष्ट लोड को देखते हुए 6 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी को अपग्रेड करने के संबंध में भी विभिन्न माध्यम से सुझाव मांगे हैं।
मौजूदा हालात पर गौर करें तो सीवर लाइन बिछाने के दौरान मैन रास्तों समेत गली मुहल्लों की जो सड़कें तोड़ी गई थीं, उनमें अभी तक अधिकांश सड़कों का पुर्ननिर्माण नहीं हो पाया है।
एनजीटी द्वारा कराई जा रही जांच में जल निगम और स्थानीय निकाय के कई अफसर लापरवाही के चलते सीबीआई के घेरे में आ सकते हैं। जिसके चलते उनमें अजीब सी दहशत है।