कुछ समय पहले 35 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाली चीनी के दाम 41 से 42 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। देशभर में चीनी का उत्पादन करीब 53 लाख टन कम होने के चलते दामों में उछाल आया है। वहीं, व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार चीनी पर से आयात शुल्क नहीं हटाती है तो चीनी के रेट और बढ़ सकते हैं।
बता दें कि देश में चीनी का उत्पादन करने वाला सबसे बड़ा राज्य महाराष्ट्र है। पिछले वर्ष सूखा पड़ने के कारण यहां उत्पादन क्षमता में करीब 50 फीसदी कमी आई है। साथ ही वहां के किसानों ने गन्ने की बुवाई भी कम कर दी है। पिछले कुछ सालों तक देशभर में चीनी का रिकार्ड उत्पादन हो रहा था।
दो साल पहले हालत यह थी कि चीनी मिलों को 2100 रुपये क्विंटल तक में चीनी बेचनी पड़ी थी। इसके चलते किसानों को भुगतान करना भी मुश्किल हो गया था। पिछले सीजन का गन्ना भुगतान अब जाकर हुआ है।
इस समय थोक में चीनी का दाम 4000 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि, फुटकर में चीनी का रेट 41 से 42 रुपये प्रति किलोग्राम है। शहर के कारोबारी व वायदा आयोग के सदस्य रहे पंकज अग्रवाल और गन्ना विशेषज्ञ प्रदीप खंडेलवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा कम नहीं हुआ है, लेकिन महाराष्ट्र में पिछले साल सूखे के कारण गन्ने की बुआई में कमी आई थी, जिसका असर देश के कुल चीनी उत्पादन पर पड़ा है।
उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में देश में 2.58 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था। जबकि, इस सीजन में 2.05 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है। देश में करीब 53 लाख टन चीनी का उत्पादन कम हुआ है।
पंकज अग्रवाल ने कहा कि अगर सरकार ने चीनी पर से आयात शुल्क नहीं हटाया तो आने वाले समय में चीनी और महंगा हो सकता है। वहीं, जिला गन्ना अधिकारी नम्रता कश्यप ने बताया कि तीन साल पहले जिले में गन्ने का रकबा करीब 21 प्रतिशत कम हो गया था।
लेकिन पिछले दो सालों में गन्ने का रकबा 19 प्रतिशत बढ़ गया है तथा इस सीजन में गन्ना मूल्य का भुगतान समय पर होने से अनुमान है कि गन्ने का रकबा और बढ़ेगा।