विदेश जाकर पैसा कमाने की कीमत कई बार पूरे परिवार को चुकानी पड़ती है। क्षेत्र के गांव मोड़ी कलां से नौकरी करने सऊदी अरब गये एक व्यक्ति की वहां हत्या के बाद परिवार न्याय के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
परिवार को न तो बेटे का मुंह देखने को मिला और न ही संबंधित कंपनी द्वारा किसी प्रकार का मुआवजा दिया गया। अब परिवार ने इंसाफ के लिए हाईकोर्ट का सहारा लिया है। हाफिजपुर थाना क्षेत्र के गांव मोड़ी कलां निवासी इमामुद्दीन का पुत्र आरिफ (37) पांच पहले सऊदी अरब काम की तलाश में गया था।
शहर दम्माम में बा-कत्ब की एक ट्रेडिंग ट्रांसपोर्ट कंपनी में बतौर ड्राइवर काम करता था। आरिफ के भाई इकबाल निजाम ने बताया कि अक्टूबर 2015 में उनका भाई आरिफ लापता हो गया। उसके लापता होने की खबर पर परिवार के सदस्य सऊदी अरब पहुंच,
लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। अप्रैल 2016 में उन्हें पता चला कि आरिफ की ट्रक लूट के बाद हत्या कर दी गयी थी। शव को उसकी कंपनी ने बिना किसी को बताये सपुर्द-ए-खाक कर दिया।
सूचना के बाद परिवार के लोग सऊदी अरब में भारतीय दूतावास पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज करायी। परिजनों का आरोप है कि कंपनी की लापरवाही के कारण उन्हें आरिफ का आखिरी बार मुंह तक देखना नसीब नहीं हुआ।
अब कंपनी न तो मुआवजा दे रही है और न ही आरिफ के साथ हुए हादसे की जांच कर रही है। मृतक के भाई इकबाल निजाम ने इंसाफ के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जिससे भारतीय विदेश मंत्रालय के जरिये सऊदी अरब में आरिफ के हत्यारों को सजा दिलायी जा सके।
आरिफ की मौत के बाद माता पिता और पत्नी, चार बच्चों को रो रोकर बुरा हाल है। आरिफ की एक पुत्री व तीन पुत्र हैं। बड़ी बेटी 11 साल की है। आरिफ के जाने के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। परिवार को बच्चों की परवरिश की चिंता सता रही है।
परिवार को उम्मीद है कि भारतीय सरकार अगर उनकी मदद करे तो सऊदी अरब की कंपनी उन्हें मुआवजा दे सकती है। जिससे आरिफ के परिवार को भरण पोषण हो जाएगा।