बिजलीघरों के रखवाले अवर अभियंताओं की लापरवाही से सोमवार रातभर देहात क्षेत्र के दो बिजलीघर ठप रहे। इसके चलते दर्जनों गांवों की 40 हजार की आबादी परेशान रही। मंगलवार सुबह किसी तरह जसरूपनगर बिजलीघर तो चालू हो गया लेकिन धीरखेड़ा बिजलीघर देर शाम तक भी ठप रही।
अधीक्षण अभियंता ने जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं ग्रामीणों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही है। प्रदेश सरकार अक्टूबर माह तक जिले के तमाम गांवों में विद्युतीकरण का सपना देख रही है। लेकिन बिजलीघरों पर तैनात अवर अभियंता सरकार के प्रयास को पलीता लगा रहे हैं।
आलम यह है कि शाम पांच बजे के बाद देहात क्षेत्र में फाल्ट हो जाए तो पूरी रात गांवों की आपूर्ति बाधित रहती है। अफसरों के कार्यालय छोड़ने के बाद कोई कर्मचारी उपभोक्ताओं की समस्याओं को नहीं सुनता। यही कारण रहा कि सोमवार पूरी रात धीरखेड़ा और जसरूपनगर बिजलीघर ठप पड़े रहे।
सोमवार शाम को दादरी फाटक के पास हाईटेंशन लाइन के केबिल बॉक्स में फाल्ट हो गया था। इससे दोनों बिजलीघरों के ठप होने से दर्जनों गांवों में अंधेरा छा गया। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने अफसरों से की। लेकिन अवर अभियंता केवल आश्वासन देते रहे।
मंगलवार सुबह करीब 9 बजे जसरूपनगर बिजलीघर को तो चालू करा दिया गया। लेकिन धीरखेड़ा बिजलीघर देर शाम तक भी चालू नहीं किया जा सका था। वहां तैनात अवर अभियंता इंस्ट्रूूमेंट उपकरण न होने की बात कह रहे थे।
हालांकि इस बार अधीक्षण अभियंता ने इस मामले में अधिशासी अभियंता को जांच के निर्देश दिए हैं।
धीरखेड़ा बिजलीघर के ठप होने से कैली, कब्ट्टा, कूड़ी, धीरखेड़ा, नया गांव की आपूर्ति बाधित रही। वहीं जसरूपनगर बिजलीघर ठप रहने से पांची, जोगीपुरा, दस्तोई, जसरूपनगर समेत एक दर्जन गांवों की बत्ती गुल रही।
मुख्यतया फाल्ट की समस्या बनने पर ग्रामीणों को जल्द राहत मिल सके, इस उद्देश्य से ही दिल्ली रोड बिजलीघर पर जन सुविधा केंद्र की व्यवस्था की गई थी। लेकिन यहां तैनात कर्मी लापरवाही कर रहे हैं।
अधीक्षण अभियंता भूवदेव प्रसाद का कहना है कि रातभर बिजलीघर ठप्प रहना बेहद गंभीर मामला है। इस संबंध में अधिशासी अभियंता को जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।