गांव बदरखा में जांच करने पहुंची एसआईबी की टीम। स्रोत विभाग
हापुड़। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में पंजीकृत फर्म बोगस फर्मों से कारोबार दर्शाकर विभाग को चूना लगा रही हैं। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) टीम ने गढ़ क्षेत्र के बदरखा में छापा मारकर स्क्रैप रीसाइक्लिंग फर्म पर जांच की। इसमें पता लगा कि फर्म ने 11 माह निल रिटर्न दाखिल किया। इसके बाद दो माह में ही 29.5 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाकर 7.31 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हड़प ली।
जांच के बाद टीम ने दस्तावेज कब्जे में लेकर फर्म संचालक को तलब किया और विभाग के खाते में 50 लाख रुपये की आईटीसी विभाग के खाते में वापस कराई है। गढ़ क्षेत्र के गांव बदरखा स्थित सेंस रीसाइक्लिंग फर्म प्राइवेट लिमिटेड केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) खंड एक में दो जुलाई 2025 को पंजीकृत हुई थी।
फर्म लोहा, स्टील की खरीद-बिक्री और रीसाइक्लिंग का कार्य करती है लेकिन पंजीयन के बाद मई 2026 तक निल रिटर्न दाखिल किया। जबकि जून 2026 में 7.5 करोड़ रुपये की सप्लाई और जुलाई में 22 करोड़ रुपये की सप्लाई की। जिसके बाद फर्म विभाग की रडार पर आ गई।
एसआईबी संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह के निर्देशन में उपायुक्त विमल कुमार दुबे, सहायक आयुक्त विमल कुमार शुक्ला, राज्य कर अधिकारी सतीश तिवारी व स्वतंत्र सिंह फर्म की स्थलीय जांच करने पहुंचे। जांच के दौरान पता लगा कि फर्म संचालक ने दिल्ली और हिंडन विहार, गाजियाबाद की दो फर्मों से खरीद कर 7.31 करोड़ रुपये की आईटीसी क्लेम कर ली। दोनों फर्मों की जांच की गई तो डाटा विश्लेषण के दौरान बोगस पाई गई।
जांच में पता लगा कि फर्म ने 1.5 करोड़ रुपये के ई वे बिल कैंसिल कर रखे थे। टीम को जांच के दौरान कारोबार के अनुरूप स्टॉक बहुत कम पाया गया। जिस पर फर्म संचालक ने बताया कि स्टॉक की बिक्री कर दी गई। इसके बाद टीम ने दस्तावेज कब्जे में लेकर फर्म संचालक को कार्यालय में तलब किया है। साथ ही बोगस फर्मों से कारोबार करने पर 50 लाख रुपये की आईटीसी वापस विभाग के खाते में लौटाई गई।
संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह का कहना है कि फर्मों की खरीद-फरोख्त का टीम डाटा विश्लेषण कर रही है। बोगस कारोबार और आईटीसी हड़पने वाली फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।