हापुड़। पूजा, हवन और दीपक जलाने के लिए बनाए जाने वाले अखाद्य वसा उत्पाद अब पूजा घी के नाम से नहीं बेचे जा सकेंगे। ऐसे उत्पादों की पैकिंग पर घी शब्द लिखने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही पैकेट पर काले रंग का क्राॅस निशान बनाना और हिंदी व अंग्रेजी में मोटे अक्षरों में ''खाने के लिए नहीं'' लिखना अनिवार्य होगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के आदेश के बाद जिले में विभागीय अधिकारियों ने निर्देश जारी किए हैं। दशहरा के बाद जिले में दुकानों पर छापा मारकर कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के अनुसार, कुछ इकाइयां वनस्पति, रिफाइंड तेल, सुगंध और अन्य रसायनों का इस्तेमाल कर पूजा-पाठ के लिए अखाद्य वसा उत्पाद तैयार करती हैं। इनका रंग, गंध और पैकिंग खाद्य घी जैसी होने के कारण लोग भ्रमित होकर इन्हें खाने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए उत्पादों की पहचान स्पष्ट करने और उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
निर्देशों के तहत खाद्य घी और पूजा में इस्तेमाल होने वाले अखाद्य उत्पादों को एक ही ब्रांड नाम से भी नहीं बेचा जा सकेगा। पैकेट पर ऐसी स्पष्ट पहचान होनी चाहिए, जिससे उपभोक्ता खाद्य और अखाद्य उत्पादों के बीच आसानी से अंतर कर सकें। पाम ऑयल या गाय-भैंस के दूध से बने उत्पादों की पहचान भी स्पष्ट करना जरूरी होगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने घी, तेल और अन्य खाद्य सामग्री बनाने वाली इकाइयों को भी सतर्क किया है। यदि खाद्य पदार्थ बनाने या पैक करने वाले परिसर में पैराफिन, मिनरल ऑयल अथवा पूजा सामग्री में इस्तेमाल होने वाले अन्य रसायन पाए जाते हैं तो संबंधित इकाई के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मामले में सहायक आयुक्त द्वितीय चंद्रशेखर मिश्रा का कहना है कि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित उत्पादों का स्टॉक जब्त किया जाएगा। इसके अलावा लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित करने की कार्रवाई भी होगी।