केंद्र और प्रदेश सरकार के अफसरों की लापरवाही के कारण मेरठ-बुलंदशहर एनएच-235 के निर्माण की लागत तीन सौ करोड़ रुपये बढ़ गई है। पहले इस एनएच को फोर लेन करने और खरखौदा, हापुड़, गुलावठी आदि स्थानों पर बाईपास बनाए जाने का कार्य 2012 में शुरू होकर 2015 तक पूरा होना था।
इस कार्य का टेंडर करीब 500 करोड़ रुपये में गुड़गांव (हरियाणा) की सी एंड सी कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को दिया गया था। इस कंपनी ने मेरठ रोड पर धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के पास अपना कैंप आफिस स्थापित कर तमाम मशीनरी भी एकत्रित कर ली थीं तथा पंकज कुमार को अपना प्रोजेक्ट मैनेजर तैनात किया था।
उनके तमाम प्रयासों के बावजूद आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो सका। उल्लेखनीय है कि एनएच-235 मेरठ, हापुड़ और बुलंदशहर जिले से होकर गुजरता है। मेरठ जिले के अधिकारियों ने तो भूअर्जन का कार्य वर्ष 2013 में शुरू करा दिया था,
लेकिन कंपनी के बार-बार अनुरोध के बावजूद हापुड़ जिले में वर्ष 2014 तक भी यह कार्य नहीं हुआ। जबकि बुलंदशहर जिले में भी मामला अधर में लटका रहा। वन मंत्रालय से पेड़ों के कटान की स्वीकृति बामुश्किल वर्ष 2014 में मिल सकी।
ऐसे में कार्य शुरू होने में दो साल विलंब होने पर टेंडर लेने वाली कंपनी ने पुरानी दरों पर कार्य करने में असमर्थता जताते हुए नयी दरें तय किये जाने की मांग एनएचएआई के अफसरों के सामने रखी। लेकिन कंपनी की मांग नहीं मानी गई।
इस पर कंपनी ने टेंडर निरस्त करा लिया। हालांकि एनएचएआई के प्रोजैक्ट डायरेक्टर संजय मिश्रा के मुताबिक अब मेरठ बुलंदशहर एनएच-235 के निर्माण का टेंडर 800 करोड़ रुपये में हो गया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कड़े निर्देशों के बाद भूअर्जन आदि का कार्य भी तेजी से हुआ है। लेकिन इस एनएच के निर्माण की लागत केंद्र और प्रदेश सरकार के अफसरों की लापरवाही से तीन सौ करोड़ रुपये बढ़ गई है, पहले यही कार्य करीब 500 करोड़ रुपये में होना था।