महंगाई की मार अब सीधे-सीधे गरीबों की थाली पर पड़ने लगी है। पिछले एक सप्ताह में गेहूं का आटा, सूजी और मैदा चार रुपये प्रति किलो महंगा हो गया है। हालत यह है कि गरीब की थाली में रोटी का भी टोटा पड़ने लगा है। वहीं, सरकारी रेट पर मिलने वाले सस्ते राशन की कालाबाजारी से गरीब तबका परेशान है।
अच्छेे दिन आने का वादा कर केंद्र की सत्ता पर काबिज होनेे वाले नेताओं के तो अच्छे दिन आ गए, मगर गरीब तबका महंगाई की मार से परेशान है। दाल के दाम तो पहले ही आसमान छू रहे हैं। चने की दाल तीन माह में 70 रुपये से बढ़कर 140 रुपये हो गई है।
अब आटा महंगा होने के चलते गरीब की थाली में दो जून की रोटी का भी संकट आ खड़ा हुआ है। किराना व्यापारी राजेंद्र पंसारी बताते हैं कि एक सप्ताह में गेहूं का आटा, सूजी और मैदा चार रुपये किलो यानि 400 रुपये प्रति क्विटंल महंगा हुआ है।
अनाज के कारोबारी राजीव (दत्तियाना) ने बताया कि गेहूं पर तेजी है, जिसके चलते वह 2000 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है। जबकि यही गेहूं 1500 रुपये क्विंटल बिक रहा था।
सस्ते राशन की हो रही कालाबाजारी
सूत्रों के अनुसार गरीबों को सस्ते दर पर मिलने वाले गेहूं और चावल सरकारी अफसरों की मिलीभगत से खुलेआम बाजार में महंगे दामों पर बिक रहा है। शहर में कई ऐसे ठिकाने हैं जो सिर्फ सस्ते राशन का गेहूं और चावल खरीदने का धंधा करते हैं।
कई डीलर तो ऐसे हैं जो अधिकांश राशन का माल सरकारी गोदाम से सीधे इन ठिकानों पर भेज देते हैं। परिणाम स्वरूप गरीबों को बाजार से महंगा आटा खरीदना पड़ता है।
बोले अफसर
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व रजनीश राय ने बताया कि राशन की कालाबाजारी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। शिकायत करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही शिकायतकर्ताओं का नाम गुप्त रखा जाएगा।