प्रदेश की भाजपा सरकार ने लापता लोगों को अपनों से मिलवाने का फरमान जारी किया है। वहीं, पुलिस के लिए यह काम सिरदर्द बन रहा है। जबकि अधिकारी इस अभियान में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसके चलते शासन का फरमान फाइलों में गुम होने की आशंका है।
जिले में लापता लोगों की फेहरिस्त लंबी है। जनवरी माह से लेकर मार्च माह तक 9 महिलाएं/ युवती लापता हुईं। जिनमें 5 को पुलिस बरामद कर चुकी है। 10 पुरूष/ युवक गायब हुए। जिनमें चार को पुलिस ढूंढ चुकी है।
इसके अलावा 7 बच्चे में से 4 बरामद कर लिए गए हैं जबकि तीन अब भी लापता हैं। लापता लोगों को ढूंढने में पुलिस शुरू से ही ढिलाई बरतती है। काफी चक्कर काटने के बाद एफआईआर दर्ज की जाती है। उसके बाद खोजबीन शुरू की जाती है।
ऐसे में पुलिस पर लापरवाही के आरोप भी लगते हैं। लेकिन नई सरकार के आते ही मुख्यमंत्री सहित आला अधिकारियों ने पुलिस को सुधरने की हिदायत देनी शुरू कर दी है।
एसपी हेमंत कुटियाल ने बताया कि लापता लोगों की बरामदगी को लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि परिजनों से संपर्क कर बिछड़ों को अपनों से मिलवाया जाएगा।
गांव हरसिंहपुर निवासी 20 वर्षीय महेश पुत्र महेंद्र एक वर्ष दो माह से गायब है। पीड़ित पिता ने बताया कि वह उसे ढूंढकर थक गए हैं। लेकिन उसके बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा। पुलिस से भी बरामदगी के बारे में भी संपर्क किया गया है। इसके अलावा भी कई लापता लोगों के परिजन उन्हें ढूंढकर थक चुके हैं।