गालंद में डंपिंग ग्राउंड के विरोध में धरने पर बैठे ग्रामीण
पिलखुवा। गाजियाबाद नगर निगम की ओर से मसूरी नगर पट्टी के पास गालंद गांव में बनाए गए डंपिंग ग्राउंड का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रविवार को सैकड़ों ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठक गए। ग्रामीणों ने डंपिंग ग्राउंड स्थल पर ही टेंट लगा दिया। उनका कहना है कि जब तक डंपिंग ग्राउंड को यहां से नहीं हटाया जाएगा, नगर निगम के खिलाफ धरना जारी रहेगा।
ग्राम प्रधान संजय कुमार कोरी ने बताया कि शनिवार की रात गांव में स्थित पंचायत घर पर ग्रामीणों की बैठक हुई। इसमें जब तक डंपिंग ग्रउंड नहीं हटेगा वहीं धरना पर बैठने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को ग्रामीणों ने डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा डालने आए गाजियाबाद के नगर निगम कर्मियों को खदेड़ा दिया था। धरना पर बैठने वालों में संजय कुमार, लाखन ग्राम प्रधान नितेंद्र तोमर, हिंडालपुर ग्राम प्रधान शिवकुमार, कुसुम देवी, मुन्नी देवी, कश्मीरी, सुधा, मिथलेश, सुशीला, अनिल फोजी, श्रवण कुमार, राजेंद्र, दीपक, मनोज तोमर, राजीव तोमर, रामोतार, अशोक, रोविन, प्रदीप, हेम सिंह, हिटलर सिंह, अमित नागर समेत सैकड़ों महिला शामिल हैं।
गुमराह कर खरीदी जमीन
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब चार साल पूर्व गाजियाबाद नगर निगम ने रिलायंस रोड पर गांव भोवापुर और गांलद के पास कूड़ा डंप करने को डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए जमीन खरीदने का प्रयास किया था। लेकिन किसानों ने वहां पर डंपिंग ग्राउंड बनाए जाने का विरोध करते जमीन देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद एक बिल्डर ने मसूरी नगर की पट्टी के पास गांव गालंद में हाईटेक कॉलोनी और पानी का प्लांट लगाने के नाम पर जमीन खरीदी। जिसको ग्रामीण विजय, अजय, कंछीद, कुवरपाल, सबलू समेत कई किसानों से करीब 65 बीघा जमीन का बैनामा और एग्रीमेंट किया था। आरोप है कि उक्त बिल्डर किसानों को गुमराह कर खरीदी जमीन गाजियाबाद नगर निगम को बेच दी। इस जमीन पर डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया।