न्यायालय की भूमि के लिए सड़क पर उतरे अधिवक्ता
हापुड़। जिला बनने के 11 साल बाद भी जिला न्यायालय के नए भवन की स्थापना के लिए भूमि का आवंटन नहीं हो पाया है। इससे अधिवक्ता गुस्से में हैं। इसे लेकर हापुड़ बार एसोसिएशन के अधिवक्ता शुक्रवार को सड़क पर आ गए। सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता जुलूस के रूप में पैदल ही कलक्ट्रेट पहुंचे और धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान जमकर नारेबाजी की। जुलूस के कारण सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रही।
बार एसोसिएशन के सचिव रविंद्र निमेष ने कहा कि जनपद बने हुए 11 सील बीत चुके हैं। हापुड़ में जनपद न्यायालय की स्थापना फरवरी 2015 में हो चुकी है। जिला बनने से पूर्व तहसील स्तर पर 7 कोर्ट कार्य कर रही थीं। वर्तमान में 25 न्यायालय जनपद में कार्यरत हैं। जनपद न्यायाधीश का न्यायालय पुराने मुंसिफ न्यायालय में चल रहा है। कई न्यायालय नगर पालिका परिसर में, तीन न्यायालय मोदीनगर रोड पर हैं। इससे वादकारियों एवं अधिवक्ताओं के समय एवं धन का अपव्यय हो रहा है। अलग अलग स्थानों पर न्यायालय होने के कारण मुख्य मार्गों पर भीड़ बढ़ रही है और जाम की समस्या रहती है।
वन वे किया गया ट्रैफिक
अधिवक्ताओं का जुलूस कचहरी परिसर से निकलकर तहसील चौपला, मेरठ तिराहा होता हुआ कलक्ट्रेट पहुंचा। इस दौरान ट्रैफिक को वन वे कर दिया गया और सड़क पर जाम की स्थिति रही। इस स्थिति से वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
एक सप्ताह का दिया समय
अधिवक्ताओं ने एसडीएम विवेक यादव को ज्ञापन सौंपा। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत चौधरी ने कहा कि एक सप्ताह में मांग नहीं पूरी हुई तो अधिवक्ता अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। इस दौरान बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संजय कंसल, पूर्व सचिव भोपाल सिंह शिशौदिया, अनिल आजाद, रणवीर सिंह, पीडी वर्मा, एन उल हक, देवेंद्र पाल सिंह पंवार, रमेश चंद्रा, श्यामवीर सिरोही, देवेंद्र सिंह खरे, हरीश शर्मा, गजेंद्र सिंह चौहान, ओमेंद्र तोमर, अक्षय कुमार, अक्षय गुप्ता, अनुज शर्मा, विवेक गर्ग अधिवक्ता मौजूद रहे।
32.99 एकड़ भूमि की गई थी चिन्हित नहीं जारी हुआ बजट
स्थानीय प्रशासन ने एचपीडीए की 32.99 एकड़ भूमि जिला न्यायालय के लिए चिन्हित की है। उक्त भूमि की खरीद के लिए शासन से धनराशि आवंटित कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को नवंबर 2021 में पत्र प्रेषित किया गया था। इसके पश्चात भी शासन ने धनराशि जारी नहीं की। अधिवक्ताओं का कहना है कि जिला कलक्ट्रेट भवन में डीएम, एडीएम, एसडीएम, चकबंदी अधिकारी आदि कोर्ट कार्य कर रही हैं। अधिवक्तागण को पुकार होने पर जिला न्यायालय परिसर से पैरवी के लिए जिला कलक्ट्रेट भवन जाना पड़ता है। अधिवक्ता के देरी से पहुंचने पर अधिकांश मामलों में संबंधित न्यायालय वाद को वादकारियों के खिलाफ निर्णित कर देती हैं।