धमाके से टूटी अफसरों की नींद, धौलाना में दो फैक्टरियां कीं सील
धौलाना। औद्योगिक क्षेत्र में शनिवार को अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके से 13 लोगों की मौत हो जाने के बाद रविवार को अफसरों की नींद टूटी। डीएम मेघा लाव-लश्कर के साथ फैक्टरियों के मुआयने के लिए पहुंचीं। दस महकमों के अफसरों की टीम उनके साथ रही। टीम ने एक-एक फैक्टरी के दस्तावेज खंगाले। 24 के अंदर जाकर जांच पड़ताल की। कमियां मिलने पर दो को सील कर दिया गया। धमाके पर सीएम योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख देखते हुए अभियान आगे भी जारी रहेगा। कमियां मिलने पर आठ फैक्टरी को नोटिस जारी किया, दस पर लटके मिले ताले।
प्लास्टिक के सामान का था लाइसेंस, बनाई जा रही थी लोहे की जालियां
जांच टीम ने फैक्टरी नंबर एफ-फाइव का मुआयना किया। बाहर बोर्ड पर प्लास्टिक का सामान बनाने की जानकारी थी। दस्तावेज मांगे तो लाइसेंस भी इसी काम के लिए था, लेकिन अंदर कहानी कुछ और थी। वहां प्लास्टिक थी ही नहीं। लोहे की जालियां बनाई जा रही थीं। डीएम के आदेश पर टीम ने यहां सील लगा दी। लोगों ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में यह बड़ा खेल है। लाइसेंस किसी चीज का है और बनाया कुछ और ही जा रहा है। जिस फैक्टरी में धमाका हुआ, उसमें भी यही किया जा रहा था। रूही इलेक्ट्रिक के नाम से लाइसेंस जारी हुआ था इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान बनाने का लेकिन पहले इसमें बच्चों की खिलौना बंदूक बनाई जा रही थीं। बाद में फैक्टरी को किराए पर दे दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स के लाइसेंस पर ही अवैध रूप से पटाखे बनाए जाने लगे।
पीवीसी के खोली थी फैक्टरी बनाए जा रहे थे सेमीकंडक्टर
प्लॉट एफ-15 पर चल रही औद्योगिक इकाई में कागजों में पॉली विनाइल क्लोराइड से सामान बनाया जा रहा था। अफसर अंदर पहुंचे तो यहां समिकंडक्टर बनते मिले। इसके लिए रसायनों का प्रयोग भी किया जा रहा था। रसायन के प्रयोग से लेकर भंडारण तक के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इस फैक्टरी को भी सील कर दिया गया।
डीएम मेधा रूपम ने बताया कि रविवार को एसडीएम धौलाना, पुलिस क्षेत्राधिकारी धौलाना, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, उपायुक्त उद्योग, क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सहायक निदेशक कारखाना, क्षेत्रीय प्रबंधक यूपीएसआइडीसी, अधिशासी अभियंता पावर कारपोरेशन, उपायुक्त वाणिज्यकर, सहायक श्रमायुक्त के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम बनाई गईं थी। दो औद्योगिक इकाइयों में निर्माण कार्य चल रहा था और एक का भूखंड खाली पड़ा था।
बच्चों से कराया जा रहा था काम
प्रशासन की टीम ने प्लॉट संख्या एफ-56 स्थित मधुसूदन इंडस्ट्रीज औद्योगिक इकाई का मुआयना किया। यहां मालिक ने 15 कामगार परिवार को बच्चे समेत फैक्टरी परिसर के अंदर ही रखा हुआ था। अधिकारियों ने परिवारों के विस्थापन का अल्टीमेटम देते हुए औद्योगिक इकाई को सील करने के निर्देश दिए हैं। कई और फैक्टरियों के बारे में जानकारी मिली है कि वहां मजदूरों को परिवार सहित रखा जा रहा है। इनके बच्चे स्कूल भी नहीं जा रहे हैं।