स्कूल बसों की न फिटनेस न पंजीकरण, खटारा में ढो रहे बच्चे
हापुड़। स्कूलों को ट्रांसपोर्ट फीस चुकाने के बाद भी आपके नौनिहाल स्कूली बसों में सुरक्षित नहीं है। जिले के अधिकतर स्कूल बसों की जहां फिटनेस नहीं हैं, वहीं अधिकतर बसें मानकों को भी पूरा नहीं करती। गाजियाबाद हादसे के बाद परिवहन विभाग की आंखें जरूर खुली हैं और पिछले दो दिनों से कार्रवाई की जा रही है।
जिले में करीब 550 स्कूल हैं, जिनमें करीब एक हजार बसों में करीब 30 हजार बच्चे स्कूल आते जाते हैं। बड़ी बात है कि शहरी क्षेत्र के स्कूल तो थोड़ा बहुत मानकों पर खरे उतरते भी हैं, लेकिन देहात के स्कूलों को इससे कोई सरोकार नहीं हैं। यहां स्कूल बस के नाम पर वैन, छोटा हाथी बच्चों को ढो रहे हैं। अधिकतर वैन एलपीजी से संचालित हैं, जो कभी भी हादसे का शिकार बन सकती हैं। एक हजार बसों में परिवहन विभाग के समक्ष केवल 400 बसों का पंजीकरण हैं, जबकि आधे से अधिक बिना पंजीकरण के दौड़ रही हैं। फिटनेस तो मात्र दस फीसदी वाहनों के ही पास है। अधिकतर बसों के पास न परमिट हैं ना बसों में बच्चों की सुरक्षा का कोई प्रबंध। फिटनेस, स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड किट, अनुभवी चालक सारी खामियां अधिकतर स्कूली बसों में है। ऐसे में नौनिहालों की जान रामभरोसे है।
शहर में स्कूल बसें --करीब 1000
- बसों से स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या-30 हजार
- जिले में पंजीकृत बसों की संख्या- 400
हादसों के बाद बढ़ रही चिंता --
गाजियाबाद की घटना के बाद डर लगने लगा है। स्कूल संचालकों और परिवहन विभाग को मानकों का पालन करने वाली बसों का ही संचालन कराना चाहिए। - गोपाल सरीन, अभिभावक।-फोटो-18
मासूमों की जान से न हो खिलवाड़
स्कूल संचालक पैसा बचाने के लिए मानकों का पालन नहीं करते हैं। बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। अभियान चलाकर बसों की चेकिंग होनी चाहिए। - विनय अरोड़ा, अभिभावक। - फोटो-19
अधिकारी भी दें ध्यान
बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है। अभिभावक खुद भी नजर रखें और उच्चाधिकारी खुद संज्ञान लेकर करें कार्रवाई। - आंचल तोमर, अभिभावक।- फोटो-20
तेज गति से न दौड़ें वाहन
सड़कों पर दौड़ने वाली स्कूल बसों की गति सीमित होनी चाहिए। इसके लिए बसों में गति नियंत्रक लगे और खुद स्कूल प्रबंधन भी इस पर ध्यान रखें। - जसमीत सिंह, अभिभावक।-फोटो-21
स्कूल बसों में इन नियमों का पालन जरूरी
- सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल बस पीले रंग से पेंट होनी चाहिए।
- बस के आगे व पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- सभी खिड़कियों के बाहर लोहे की ग्रिल होनी चाहिए।
- अग्निशमन यंत्र लगा हो।
- स्कूल का नाम और फोन नंबर होना चाहिए।
- दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
- चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव हो।
- ट्रांसपोर्ट परमिट होना चाहिए।
अभिभावक यह रखें सावधानी
- बस खड़ी होने पर ही बच्चों को चढ़ाएं।
- चालक की हरकतों पर नजर रखें।
- ध्यान रखें कि कहीं चालक नशे में तो नहीं है।
- बस में हेल्पर के साथ स्कूल के जिम्मेदार शिक्षक हैं या नहीं।
- बच्चों के आने और जाने के समय पर ध्यान रखें।
- बस के अंदर बच्चों को बैठने को जगह मिलती हैं या नहीं।
- बस में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। --
12 स्कूल बसों पर की कार्रवाई
हादसे के बाद परिवहन विभाग के अधिकारी शुक्रवार को सड़क पर उतरे। एआरटीओ प्रवर्तन महेश कुमार शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को भी हापुड़ और पिलखुवा में 11 स्कूल बसों के खिलाफ कार्रवाई की। इन बसों की फिटनेस नहीं थी, जिसके बाद इनके चालान किए गए।
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इन स्कूलों की बसों के किए गए चालान-
बीआर इंटरनेशनल स्कूल, मेरठ रोड
टैगोर शिक्षा सदर, हापुड़
कुड़ियामल गर्ल्स स्कूल, हापुड़
सरस्वती शिशु मंदिर, हापुड़
संत ईश्वर सिंह स्कूल, पिलखुवा
एसेंट चैरिटेबिल ट्रस्ट स्कूल, पिलखुवा
परमेश्वरी देवी गर्ल्स स्कूल, पिलखुवा
कैस्टल पब्लिक स्कूल, बाबूगढ़
माउंट कोलंबस स्कूल, सिंभावली
वंशिका पब्लिक स्कूल, पिलखुवा
पुष्पावती पब्लिक स्कूल, पिलखुवा
शुक्रवार को गढ़ रोड पर स्कूल बस के कागजात देखती टीएसआई मनु चौधरी । संवाद- फोटो : HAPUR
सड़क पर दौड़ती खटारा स्कूल बस में बैठे बच्चे । संवाद- फोटो : HAPUR