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दो साल से स्कूल नहीं गए छात्रों के लिए बनेंगे विशेष अनुभाग

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दो साल से स्कूल नहीं गए छात्रों के लिए बनेंगे विशेष अनुभाग
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हापुड़। कोरोना महामारी में दो साल तक स्कूल नहीं जाने वाले छात्रों के लिए स्कूलों में स्पेशल सेक्शन बनाए जाएंगे। एडमिशन प्रक्रिया के दौरान ही इन बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है। कक्षा एक से तीन वाले छात्र इस श्रेणी में सबसे अधिक हैं। बच्चों का आईक्यू जांचने के बाद ही उनके लिए कक्षाओं को निर्धारण कर रहे हैं।
वर्ष 2020 में कोरोना के कारण स्कूल बंद कर दिए गए थे, दो साल से पांचवीं तक के बच्चे अधिकांश समय तक घर पर ही रहे थे। दो साल तक बच्चे प्रमोट होते रहे, कक्षा तीन से ऊपर वाले बच्चे घर पर रहकर पढ़ाई करते रहे। लेकिन इससे छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे पहले कभी स्कूल नहीं जाने के कारण घर पर भी सही से पढ़ाई नहीं कर पाए।
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शासन के आदेश के अनुसार लगातार प्रोन्नत होते रहे, इसका असर अब उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है। एलएन पब्लिक स्कूल में चल रही एडमिशन प्रक्रिया के दौरान प्रधानाचार्या आराधना बाजपेयी ने बताया कि जो बच्चे स्कूल नहीं गए और प्रोन्नत होते रहे, उनके लिए विद्यालय में स्पेशल सेक्शन बनाया जाएगा। ताकि इसमें पढ़ने वाले बच्चों के साथ अधिक मेहनत की जा सके। साथ ही कोरोना काल में पढ़ाई पर पड़े गलत प्रभाव को दुरुस्त करने के उद्देश्य से रोजाना काउंसिलिंग की भी व्यवस्था करायी जाएगी।
एडमिशन प्रक्रिया के दौरान यह कर रहे स्कूल
- दो साल तक स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों के लिए अलग सेक्शन।
- इन बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ मनोरंजक गतिविधियां।
- कक्षा के अंतराल पर काउंसिलिंग होगी।
- पढ़ाई का भार कम करने के लिए कक्षाओं का समय घटेगा।
एडमिशन के दौरान बच्चों का ले रहे आईक्यू टेस्ट
एडमिशन प्रक्रिया के दौरान बच्चों का आईक्यू टेस्ट ले रहे हैं, ताकि पता चल सके कि बच्चा किस कक्षा स्तर की पढ़ाई करने में सक्षम है। क्योंकि कोरोना के दो सालों में पढ़ाई काफी प्रभावित हुई है। चिंहित किए जाने से ही बच्चों को अलग सेक्शन में अच्छे से पढ़ाई करा सकेंगे।
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-अभिषेक त्यागी, संचालक, दिनेश विद्यापीठ।
कोरोना में घर रहकर बच्चों की पढ़ाई हुई प्रभावित
कोरोना महामारी में दो साल तक घरों पर ही रहने से बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई है। स्कूल जिस प्रणाली से बच्चों का एडमिशन ले रहे हैं, वह सही है। क्योंकि बच्चों की पढ़ाई का स्तर उसमें पता चल जाता है।
-विनोद शास्त्री, अभिभावक।
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