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माइनस पांच डिग्री तापमान में रोमानिया बॉर्डर पर दो दिन से फंसे हापुड़ के छात्र

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यूक्रेन में फंसे छात्रों की सलामती के लिये मंदिर में हाथ जोड़कर प्रार्थना करते लोग संवाद - फोटो : HAPUR
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माइनस पांच डिग्री तापमान में रोमानिया बॉर्डर पर दो दिन से फंसे हापुड़ के छात्र
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हापुड़। जिले के 15 छात्र दो दिन से रोमानिया बॉर्डर पर फंसे हैं। परिजनों का आरोप है कि वहां खाने-पीने की कोई सुविधा नहीं है। बच्चों के साथ अभद्रता भी की जा रही है। माइनस पांच डिग्री तापमान में बच्चों की हालत खराब हो रही है। परिजनों ने दूतावास पर अनदेखी का आरोप लगाया है। एक छात्र के परिजन दिल्ली जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन के लिए पहुंचे हैं।
हापुड़ के जवाहर गंज निवासी दवा कारोबारी राजेंद्र गुर्जर ने बताया कि उनका भतीजा आकाश दो दिनों से रोमानिया बॉर्डर पर ही फंसा है। आकाश ने बताया कि बॉर्डर को सील कर दिया है, जहां से छात्रों को अंदर नहीं लिया जा रहा है। कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, माइनस पांच डिग्री तक तापमान जा रहा है। खाने-पीने के लिए कोई सुविधा नहीं मिल रही। मारपीट की घटनाएं भी हो रही हैं। दोपहर तीन बजे के बाद से आकाश डागर का मोबाइल बंद हो गया। इससे परिजनों की चिंता बढ़ गई है। आकाश के पिता जयविंदर डागर और माता सुषमा बेटे की सकुशल वापसी की मांग को लेकर धरना देने दिल्ली के जंतर मंतर पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि दूतावास की ओर से अनदेखी की जा रही है। उनका दावा है कि करीब 150 परिजन धरने में शामिल हो रहे हैं।
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मारपीट के वीडियो से परिजनों में दहशत
रोमानिया बॉर्डर पर फंसे हापुड़ के छात्रों ने अपने परिजनों के साथ वीडियो भी साझा किए हैं। इसमें वहां की सिक्योरिटी छात्रों के साथ अभद्रता पूर्ण व्यवहार कर रही है। मारपीट और चीख पुकार की आवाजें भी उसमें सुनाई दे रही है। इसके बाद से अभिभावक चिंतित हैं।
जिला आपदा प्रबंधन ने जारी मोबाइल नंबर
यूक्रेन में फंसे लोगों की सूचना देन के लिए जिला आपदा प्रबंधन ने वेबसाइट और मोबाइल नंबर जारी कर दिया है। जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण अधिकारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि जानकारी देने के लिए मोबाइल नंबर 9795222874 पर सूचना दी जा सकती है। छात्रों का ब्योरा राज्य कंट्रोल रूम के माध्यम से दूतावास भेजा जा रहा है। एडीएम श्रद्धा शांडिल्यायन ने बताया कि दिए गए नंबर पर परिजन यूक्रेन में फंसे छात्रों की जानकारी तत्काल दें।
यूक्रेन में फंसे छात्रों का ब्यौरा
-हिमांक सिंह पुत्र डॉ. रविंद्र कुमार निवासी श्यापुर रोड स्थित ग्रीन पार्क कॉलोनी
-समीर सलीम पुत्र सलीम चौधरी निवासी गांव सुल्तानपुर
-शादाब पुत्र अलीम निवासी गांव सुल्तानपुर
-विकास चौहान पुत्र जयवीर सिंह निवासी गांव सादारपुर, बहादुरगढ़
-नदीम सैफी पुत्र सलाउद्दीन सैफी निवासी आवास विकास कॉलोनी, बुलंदशहर रोड
-विकुल चौधरी पुत्र हरि सिंह निवासी गांव मुरादपुर, निजामपुर
-प्रदीप कुमार पुत्र विरेंद्र सिंह
-सौरभ कुमार पुत्र प्रेम सिंह निवासी बाबूगढ़ छावनी
-विकल्प भारद्वाज पुत्र मनोज भारद्वाज निवासी कृष्णा गली, स्वर्ग आश्रम रोड
-शर्मा पुत्र दिनेश कुमार शर्मा निवासी नारायणपुर बसका, धौलाना
-आकाश डागर पुत्र जयविंद्र डागर निवासी भोलागंज मेडिकल मार्केट
-सलमान पुत्र गुलबहार निवासीगांव देहरा, धौलाना
-जिशान अहमद पुत्र रिजवान निवासी गांव सरोनी
-फिरोज खान पुत्र महरूफ अली निवासी गांव सरोनी
-फैसल पुत्र मोहम्मद राशिद निवासी नई चुंगी, बुलंदशहर रोड
रोमानिया बॉर्डर के हालात ठीक नहीं, फ्लाइट बढ़ाएं
रोमानिया बॉर्डर के हालात ठीक नहीं हैं, घोर अव्यवस्थाएं हैं। छात्र अपने रिस्क पर बॉर्डर तक पहुंच रहे हैं। मैं अभी डिलिपस शहर में हूं। भारत सरकार से अपील है कि फ्लाइट बढ़ाकर करीब 15 हजार छात्रों को सकुशल वतन लाया जाए। बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव सादरपुर निवासी विकास चौहान ने यह वीडियो जारी किया है।
रोमानिया तो पहुंचा अब कब आएगा नहीं पता
नई चुंगी निवासी फैसल के मामा शाहिद ने बताया कि वह सकुशल रोमानिया तो पहुंच गया है। उसे भारत के लिए फ्लाइट कब मिलेगी इसका अभी कुछ पता नहीं है। हालांकि दूतावास लगातार संपर्क कर रहा है।
बॉर्डर पर टूट गया संपर्क
यूक्रेन में फंसे बाबूगढ़ निवासी प्रेम सिंह ने बताया कि उनका पुत्र सौरभ कुमार शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे रोमानिया के लिए निकला था। शाम छह बजे से बॉर्डर पर ही अटका हुआ है। वहां खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है। अब मोबाइल बंद आ रहा है। जिससे चिंता बढ़ गई है।
खाने-पीने की नहीं है कोई व्यवस्था
मेडिकल मार्केट निवासी आकाश डागर के पिता जयविंद्र डागर ने बताया कि उनका पुत्र शनिवार शाम से ही रोमानिया बार्डर पर फंस गया है। उनके पुत्र से उनका संपर्क तो हो रहा है लेकिन, बॉर्डर को बंद कर दिया गया है। वहां की सरकार द्वारा छात्रों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था नहीं की गई है। छात्रों के लिए चिंता बढ़ गई है।
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बच्चे के लिए हो रही है चिंता
डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि उनका बेटा हिमांक सिंह यूक्रेन की राजधानी कीव के मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के पांचवें वर्ष का छात्र है। कीव से रोमानिया बॉर्डर करीब नौ सौ किलोमीटर पड़ता है। जिसके कारण रोमानिया तक जाना मुश्किल है। ऐसे में वह भारी युद्ध के बीच रुका हुआ है। उन्हें अपने बच्चे की पल-पल चिंता सता रही है।
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