केंद्रीय विद्यालय के बिजली बिल में गड़बड़ी पर 25 अधिकारियों को नोटिस
हापुड़। केंद्रीय विद्यालय बाबूगढ़ के स्टाफ क्वार्टर को बिजली आपूर्ति करने के एवज में जारी किए बिलों में पांच साल के अंदर करीब आठ लाख रुपये का खेल किया गया। 40 एमएफ( मीटर गुणांक) के स्थान पर 01 एमएफ का फेक्टर लगाकर बिल जारी किए गए। मीटर बदलने पर निगम को गलती का अहसास हुआ तो आठ लाख की रिकवरी विद्यालय को भेज दी। इस मामले को विद्यालय ने विद्युत उपभोक्ता फोरम, विधान परिषद में उठाया। निगम के तत्कालीन आठ अधिशासी अभियंता समेत 25 अधिकारियों को चार्ज सीट जारी की गई है।
बाबूगढ़ स्थित केंद्रीय विद्यालय में स्टाफ के लिए क्वार्टर बने हैं, आपूर्ति के लिए कनेक्शन भी लिया गया था। एमएफ 40 का फेक्टर (40 यूनिट ) लगाकर बिल जारी किए जाने थे, लेकिन निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसमें घोर लापरवाही की और 01 जुलाई 2013 से 6 जनवरी 2018 तक एमएफ 01 का फेक्टर लगाकर बिल जारी कर दिए।
इस खेल में निगम को करीब आठ लाख रुपये का नुकसान हो गया। क्योंकि रीडिंग में 40 यूनिट के बजाय एक यूनिट का ही उस समय पैसा लिया गया। निगम की ओर से जितना बिल भेजा जा रहा था स्टाफ आपस में पैसे बांटकर उतना बिल अदा कर रहा था। लेकिन एक साथ आठ लाख रुपये का बिल जारी करने पर स्टाफ ने इसे भरने से इंकार कर दिया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य कई बार निगम अफसरों से मिले, लेकिन राहत नहीं मिल सकी। इस पर विद्यालय ने विद्युत उपभोक्ता फोरम की शरण ली, साथ ही मामला विधान परिषद में भी उठाया। बहरहाल इस मामले में 25 अधिकारियों को चार्ज सीट जारी कर, जवाब तलब किया गया है।
इन अधिकारियों को जारी की गई चार्ज सीट
इस प्रकरण में तत्कालीन अधिशासी अभियंता पंकज गोयल, संदीप गोयल, विपुल कुमार जैन, चंदन प्रकाश, मुकेश गर्ग, प्रिंस कुमार, सचिन कुमार, प्रवीण कुमार, लेखाकार संजय कुमार, आनंद पाल, बिल लिपिक चंद्रपाल, दिनेश शर्मा, विजय शर्मा, तत्कालीन उपखंड अधिकारी शशांक मिश्रा, यशपाल सिंह, अवधेश कुमार, दीपांशु सहाय, प्रमोद कुमार गोयल, तत्कालीन सहायक अभियंता अनूप सिंह, सचिन कुमार, योगेंद्र कुमार, तत्कालीन टीजी टू महेश कुमार, तत्कालीन अवर अभियंता राधेश्याम यादव, प्रदीप कुमार, मनोज कुमार।
2018 में काट दी थी विद्यालय की बिजली, तब से खाली हैं क्वार्टर
इस प्रकरण में दबाव बनाने के लिए बिजली निगम द्वारा 2018 में विद्यालय की बिजली काट दी गई थी। जिसके बाद समस्त स्टाफ बाहर जाकर रहने लगा, आज तक भी विद्यालय में स्टाफ के लिए बने क्वार्टर खाली ही पड़े हैं।
अलग मीटर से आपूर्ति की बनी सहमति
क्वार्टर में रहने के लिए स्टाफ को अलग से मीटर कनेक्शन लेकर आपूर्ति की सहमति बनी है। ऐसे में उम्मीद है कि बाहर जाकर रह रहा स्टाफ अब फिर से विद्यालय परिसर में ही रहने आ जाएगा।
तत्कालीन अधिकारियों में अफरा तफरी, निकलवा रहे रिकॉर्ड
चार्ज सीट जारी होने के बाद से तत्कालीन अधिकारियों में अफरा तफरी का माहौल है। निगम के विभिन्न कार्यालयों में पत्राचार कर पुराना रिकॉर्ड निकलवा रहे हैं, ताकि गलती किस स्तर पर हुई इसका जवाब दे सकें।
चार्ज सीट की गई जारी
पूरा प्रकरण संज्ञान में है, इस मामले से जुड़े समस्त अधिकारियों को चार्ज सीट जारी की गई हैं जो अलग अलग अधिकारियों के द्वारा दी गई हैं। जवाब तलब करने के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।--मनोज कुमार, अधिशासी अभियंता।
निगम अफसरों ने की लापरवाही-
विद्यालय की ओर से कोई गलती नहीं की गई। जितना बिल शुरूआत में दिया जा रहा था समय से उसका भुगतान किया जा रहा था। निगम अफसरों की लापरवाही से समस्या बनी थी, एक साथ आठ लाख का बिल भेजा गया। स्थानीय स्तर से समस्या का समाधान नहीं होने पर ही विद्युत उपभोक्ता केंद्र का सहारा लेना पड़ा। गलती करने वालों से ही रिकवरी होनी चाहिए। - सुशील गुर्जर, तत्कालीन प्रधानाचार्य।
एमडी ने लिया था संज्ञान
यह मामला केंद्रीय विद्यालय से जुड़ा होने के कारण शासन तक गरमाया था। जिसके बाद एमडी को भी पूरे प्रकरण का संज्ञान लेना पड़ा था। जिम्मेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित कराई गई, इसी के चलते चार्ट शीट जारी की गई है।
9 अधिकारी, कर्मचारियों का हटाया नाम
चार्ज शीट दिए जाने वालों में से 9 अधिकारी, कर्मचारियों के नाम हटाए गए हैं। इनमें एक की मृत्यु हुई है, कुछ सेवानिवृत्त हो गए हैं। साथ ही कुछ कर्मचारी ऐसे थे, जिनका इससे कोई मतलब नहीं था, उनके नाम भी हटाए गए हैं।