पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ बाबू सूरज प्रसाद संवाद
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1930 से 18 वर्षों तक 26 जनवरी को मनाया गया था स्वतंत्रता दिवस
हापुड़। देशभर में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन वर्ष 1930 से 1949 तक (18 वर्ष) नगर में 26 जनवरी को स्वतंत्रता (स्वराज दिवस) के रूप में मनाया जाता था। 26 जनवरी 1930 को पहली बार नगर में हर्षोल्लास से बड़ा जुलूस निकाला गया था। स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में नगर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू सरजू प्रसाद ने ध्वजारोहण किया था।
बाबू सूरज प्रसाद के परपौत्र प्रफुल्ल तापड़िया ने बताया कि दिसंबर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर में अधिवेशन हुआ था। इस अधिवेशन की अध्यक्षता देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। 2 जनवरी 1930 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा तय किया गया था कि 26 जनवरी 1930 तक यदि अंग्रेजी हुकूमत भारत को उसका प्रभुत्व नहीं देती है तो भारत खुद को स्वतंत्र घोषित कर देगा। जिसके बाद 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस घोषित कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि 26 जनवरी 1930 को पहली बार नगर में भी स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान नगर में बड़ा जुलूस निकाला गया। जुलूस का समापन होने के बाद बड़ी मंडी में जलसे का आयोजन किया गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू सरजू प्रसाद ने जलसे की अध्यक्षता की और ध्वजारोहण किया। इस दौरान उन्होंने घोषणा पत्र को पढ़ा। जनता ने दोनों हाथ उठाकर घोषणा पत्र का समर्थन किया।
उन्होंने बताया कि जलसे में शामिल होने के लिए मेरठ से सागिर साहिब भी आए थे। उन्होंने अपनी जोशीली कविताओं से लोगों में जोश भर दिया। इसके बाद नगर में कांग्रेस के सदस्य बनाने का कार्य जोर-शोर से शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी 1950 से इसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाना शुरू किया गया।