220 करोड़ का घोटाला बना फांस, ओटीएस से वंचित हजारों किसान
हापुड़। नलकूप बिलों में 220 करोड़ के घोटाले में ओटीएस योजना भी फंस गई है। जिन किसानों के बिलों में लाखों की पेनल्टी है। उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। हजारों किसान इस योजना से वंचित हो जाएंगे। करीब 20 साल से इस प्रकरण की जांच चल रही है, लेकिन कोई भी जांच एजेंसी इसका खुलासा करने में असमर्थ रही है।
वर्ष 2003 और 2004 में किसानों के नलकूप बिलों के नाम पर लेजरों के हेरफेर करने व फर्जी रसीदों से 220 करोड़ का घोटाला हुआ था। निगम के एक दर्जन से अधिक कर्मचारी व अधिकारियों पर आरोप लगे थे। प्रकरण को दबाने के लिए रसीदों को भी जला दिया गया था।
मामला खुलने पर कुछ कर्मचारियों को जेल तक भी हुई थी, तभी से इस प्रकरण की जांच ईओड्ब्ल्यूएस व अन्य संस्थाओं द्वारा की जा रही थी। दतत्कालीन डीएम अदिति सिंह ने जांच के लिए शासन को पत्र भेजा था, जिसके बाद निगम की स्पेशल टीम ने रिकॉर्ड रूम से दस्तावेज जब्त किए थे। लेकिन अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ है। इस घोटाले के कारण हजारों किसानों के बिलों पर पेनल्टी लगकर आ रही है। बिल जमा करने के बाद भी किसानों को बकाए के नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसे माफ कराने के लिए किसान अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि शासन ने सरचार्ज माफी के लिए ओटीएस शुरू की है लेकिन इस योजना का किसानों को लाभ नहीं मिलेगा। क्योंकि किसानों का सिर्फ मैनुअल एक या दो साल का ही सरचार्ज माफ हो पा रहा है। बिजली कर्मचारी किसानों की पुरानी रसीदों को देखकर उनका वर्तमान का बिल जमा करके मैनुअली नई रसीद काट रहे हैं।
कोट-
अधीक्षण अभियंता यूके सिंह का कहना है कि इस पूरे की प्रकरण की जांच चल रही है, जांच के बाद ही जिले के किसानों के बिलों को संशोधित कर राहत दिलाई जाएगी।
भाकियू करेगी आंदोलन
पिछले बीस साल से केवल जांच चल रही है। इस मामले से जुड़े अधिकारी खुले घूम रहे हैं जबकि पीड़ित किसान परेशान हैं। जल्द ही भाकियू आंदोलन करेगी। - धनवीर शास्त्री, किसान नेता।-फोटो- 36
सरकार दिलाए राहत
सरकार को इस मामले में किसानों को राहत दिलानी चाहिए। लेकिन पिछले बीस साल में इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। रात दिन किसानों को बिल का डर सताता रहता है। -पवन हूण, जिलाध्यक्ष भाकियू भानू। =फोटो-37