फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीस साल में सौ फिट गिर गया जिले का जलस्तर

विज्ञापन
विज्ञापन
बीस साल में सौ फिट गिर गया जिले का जलस्तर
विज्ञापन

हापुड़। जलसंरक्षण को लेकर जिले में चल रही योजनाएं कारगर साबित नहीं हो रही हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिलें में लगभग 20 साल में 100 फिट जलस्तर गिर गया है जबकि एक साल में ही हापुड़ और सिंभावली ब्लॉक में जलस्तर तीन फिट नीचे चला गया है। वर्तमान में जिले के तीन ब्लॉक डार्क जोन में हैं।
जिले में हापुड़, सिंभावली और गढ़ ब्लॉक का जलस्तर सबसे तेज गति से गिरा है, जिसके चलते इसे डार्क जोन की श्रेणी में रखा गया है। सबसे पहले हापुड़ और इसके बाद गढ़मुक्तेश्वर व सिंभावली ब्लॉक भी वर्ष 2013 में डार्क जाने में शामिल हुए। धौलाना ब्लॉक वर्तमान में ग्रे जोन में है। हालांकि यह भी डार्क जोन की तरफ बढ़ रहा है। सर्वे के अनुसार पिछले 20 वर्ष में जिले का औसत जलस्तर 100 फीट नीचे खिसका है। इतना ही नहीं पीने योग्य पानी डेढ़ सौ बीस फीट नीचे है। इससे ऊपर लगे हैंडपंप व अन्य साधन से मिलने वाला पानी पीने के काबिल नहीं हैं।
विज्ञापन

जलस्तर की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में जिले के भूगर्भीय जल की स्थिति सही नहीं है। वर्ष 1998 में हापुड़ जिले का औसत जलस्तर 35 फिट पर था। जबकि वर्ष 2003 में यह 49 फिट पर पहुंच गया। इसके बाद से यह लगातार नीचे खिसक रहा है। 2008 में यह 80 फिट पर पहुंच गया और अब करीब वर्षों में जिले का जलस्तर करीब 100 फिट तक नीचे गिर गया है। वर्ष 2019 और 20 के अंतर की बात करें तो यह हापुड़ और सिंभावली का जलस्तर तीन फिट से अधिक नीचे गया है।
जिले के तीन ब्लॉक पिछले लंबे समय से डार्क जान में हैं। हापुड़ में आबादी क्षेत्र होने के कारण तेजी से जलस्तर गिरा है। पिछले एक वर्ष में तीन-तीन फिट से अधिक पानी नीचे गया है। लोगों को जलसंरक्षण पर ध्यान देना होगा। - नौरतन कमल, सहायक जियोफीजिसिस्ट, भूगर्भ विभाग खंड मेरठ
कागजों में ही चल रही जल संरक्षण योजना
जल संरक्षण को लेकर जिले में जो भी योजनाएं चल रही हैं वो कागजों में ही दिख रही हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम केवल सरकारी भवनों में हैं और अधिकतर सफाई न होने के चलते चालू स्थिति में भी नहीं हैं। जागरूकता के नाम पर केवल विशेष दिवसों पर अभियान चलाया जाता है। राज्य अभिलेखों के अनुसार जिले में कुल 1140 तालाब हैं। इनमें से करीब 450 की जीणोद्धार हो चुका है। लेकिन इन पर कब्जे और तालाबों का सूखा होना एक अलग समस्या है।
पानी का स्तर गिरा तो बढ़ गए खर्चे
पहले घर में लगे हैंडपंप से पूरा घर काम चलाता था। लेकिन अब सबसर्मेबिल लगवाना जरूरी हो गया है। जिसमें करीब 15 हजार का खर्चा आता है। इसके बाद टंकी, पूरे घर में पानी की फिटिंग और बिजली के बिल का भी बोझ बढ़ गया है। - अमित अनेजा।
विज्ञापन

उनके घर में जबसे सबमर्सेबिल लगा है बिजली का बिल पांच सौ रुपये प्रतिमाह बढ़ गया है। पहले उनका बिल करीब डेढ़ हजार आता था, अब यह बढ़कर दो हजार हो गया है। जलस्तर बढ़ने से यह अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।-नेत्रपाल सिंह।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें