जिला अस्पताल में नहीं मिल सका इलाज, मरीज ने तड़पकर तोड़ा दम
हापुड़। दस्तोई रोड स्थित जिला अस्पताल की दहलीज पर शुक्रवार को काठीखेड़ा निवासी 42 वर्षीय व्यक्ति ने उपचार न मिलने के कारण तड़पकर दम तोड़ दिया। मदद के लिए परिजन चिल्लाते रहे, लेकिन कोई चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचा। इससे गुस्साए परिजनों ने हंगामा भी किया। लेकिन व्यवस्था से बेबस परिजन शव को लेकर वापस लौट गए।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को गांव कोठीखेड़ा निवासी 42 वर्षीय अलंकार को सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे थे। एंबुलेंस में भी उसे ऑक्सीजन पर ही अस्पताल तक लाया गया। लेकिन रास्ते में हालत अधिक बिगड़ने पर परिजन अस्पताल में मदद के लिए चिल्लाते रहे। लेकिन ऊपर खड़े स्टाफ ने उन्हें कुछ देर रुकने की बात कही।
हालत और अधिक खराब होने पर जब मदद नहीं मिली तो परिजन खुद ही अलंकार का सीना दबाकर उसका जीवन बचाने का प्रयास करने लगे। लेकिन इसका भी कोई लाभ नहीं मिला, कुछ ही देर में अस्पताल की दहलीज पर तड़पकर अलंकार ने दम तोड़ दिया। इससे गुस्साए परिजनों ने हंगामा भी किया। लेकिन व्यवस्था से बेबस परिजन शव को लेकर वापस लौट गए।
गुहार लगाते रहे परिजन, नहीं पसीजा चिकित्सकों का दिल
जिला अस्पताल में कोविड वार्ड होने के चलते वहां पर स्टाफ के अलावा चिकित्सक भी रहते हैं। परिजनों ने बताया कि अलंकार को जब वह अस्पताल लेकर पहुंचे तो उन्होंने कोविड हेल्प डेस्क पर भी मदद मांगी तथा जल्द से जल्द चिकित्सक को बुलाने के लिए कहा। लेकिन कोई चिकित्सक बाहर नहीं आया। जब अलंकार की तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उन्होंने खुद ही जोर-जोर से सीना दबाया ताकि उसकी सांस आ जाए। परिजनों ने बताया कि वह चिकित्सक को बुलाने के लिए काफी चिल्लाते रहे लेकिन कोई भी नहीं आया।
जिला अस्पताल में बिगड़ रहीं व्यवस्था, अधिकारी मौन
जिला अस्पताल में कोविड मरीजों के इलाज में जिस प्रकार की लापरवाही बरती जा रही है, ऐसा नहीं कि जिले के आलाधिकारी इससे वाकिफ नहीं होंगे। कोरोना जांच केंद्र पर जिस तरह की अव्यवस्थाएं दिख रही हैं वह भी उनके संज्ञान में होगा लेकिन अधिकारी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि पूरे दिन सोशल मीडिया पर अधिकारी सक्रिय भी रहते हैं लेकिन एक बार भी अस्पताल जाकर व्यवस्थाएं परखने की जहमत नहीं की।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि मरीजों की जान बचाई जा सके, इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है। अस्पतालों को भी इस संबंध में निर्देशित किया गया है। मरीजों की अधिकता के कारण कई बार दिक्कतें आती हैं। हालांकि इस संबंध में जांच कराई जा रही है।