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हापुड़ में 20 फीसदी गिरा बर्तन कारोबार

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कसेरठ बाजार में स्टील के बर्तन बनाते कारीगर। - फोटो : HAPUR
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हापुड़ में 20 फीसदी गिरा बर्तन कारोबार
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हापुड़। कोरोना की दूसरी लहर में जिले का बर्तन कारोबार सिमटना शुरू हो गया है। फुटकर व्यापारियों ने माल खरीदने में दिलचस्पी दिखानी बंद कर दी है और पिछले पंद्रह दिनों में बीस प्रतिशत मजदूर लॉकडाउन के भय से घरों को लौट चुके हैं। कारोबारियों का कहना है कि इस वजह से बर्तन कारोबार में 20 फीसदी तक की गिरावट आई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बर्तन बनाने के मामले में हापुड़ पहले स्थान पर है। यहां स्टील और एल्यूमीनियम के सभी प्रकार के बर्तन बनाकर दूसरे जिलों को सप्लाई होते हैं। कोरोना काल में इस कारोबार पर गहरा असर पड़ा। लॉकडाउन में मजदूर अपने घरों को लौट गए और कई महीनों तक कारोबारी संकट से जूझते रहे। अब कोरोना की दूसरी लहर ने कारोबार को एक बार फिर संकट में डाल दिया है। हापुड़ जिले में करीब 150 परिवार इस कारोबार से जुड़े हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से 15 हजार श्रमिकों का घर चलता है। लॉकडाउन की आहट के बाद जहां फुटकर व्यापारियों ने माल खरीदने में दिलचस्पी दिखानी बंद कर दी है, वहीं बाहर से आ रहे कच्चे माल के दाम भी बढने शुरू हो गए हैं। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए झारखंड, बिहार और बंगाल के मजदूरों ने अपने घरों को लौटना शुरू कर दिया है। ऐसे में कारोबारियों की मुश्किलें बढनी शुरू हो गई हैं।
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कच्चे माल के भी बढ़े दाम --
कच्चा माल पहले अब(रुपये/किलो)
स्कैप(स्टील) 40 65
स्कैप(एल्यूमीनियम) 110 130
सीट (स्टील) 90 120
सीट (एल्यूमीनियम) 152 176
सख्ती बढ़ी तो मुश्किल होगा कच्चा माल पहुंचना
जिले में जोधपुर कानपुर और भिवाड़ी से कच्चा माल आता है। लॉकडाउन की स्थिति या हालात बनते हैं तो यहां कच्चा माल आना बंद हो जाएगा और इसमें और महंगाई बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में दूसरी लहर के बाद उद्यमियों को कारोबार करना और मुश्किल हो जाएगा।
बर्तन व्यापारी नरेश अग्रवाल का कहना है कि इस बार लॉकडाउन जैसे हालात बनते हैं तो उद्यमियों के लिए उबरना मुश्किल हो जाएगा। पिछले लॉकडाउन के बाद पहले ही साठ प्रतिशत कार्य रह गया है, अब कुछ होता है तो कारोबार पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
कारोबारी संदीप जैन का कहना है कि कोरोना का डर कर्मचारियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि यहां अधिकतर मजदूर स्थानीय हैं, लेकिन जो बाहर के हैं, वे जाने शुरू हो गए हैं। ऐसे होता है तो इस कारोबार को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।
सुरेश चंद गुप्ता का कहना है कि कोरोना संकट के चलते जिले के बर्तन कारोबार की धमक कम हुई है। मुरादाबाद के बाद हापुड़ का बर्तन उद्योग प्रसिद्ध था। लेकिन कोरोना ने कारोबार की कमर पूरी तरह से तोड़ दी है।
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सोमिल गुप्ता कहते हैं कि यह संकट केवल बर्तन उद्योग पर ही नहीं है। बल्कि सभी उद्योगों पर इसका संकट है। आम लोग भी इससे अछूते नहीं हैं। लोगों को इस संकट को समझना होगा और अभी से एहतियाती कदम उठाने होंगे।
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