बिजली मीटरोें में रीडिंग के नाम पर होने वाला खेल अब नहीं हो सकेगा। पावर कॉरपोरेशन ने मीटर की बिलिंग प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। मीटर रीडरों के मोबाइल फोन और मशीन को एक सॉफ्टवेयर से जोड़ा गया है। मोबाइल में लगी लीड को मीटर में लगाने पर मशीन वास्तविक रीडिंग का बिल ही जारी करेगी। इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। जिले में बड़े पैमाने पर घपले पकड़े जाने के बाद मीटर विभाग की तकनीकी टीमों ने कवायद शुरू कर दी है।
हापुड़ का विद्युत निगम भ्रष्टाचार की जड़ें इस कदर मजबूत हैं कि आए दिन कोई न कोई मामला उजागर होता रहता है। कभी नलकूप बिलों के लेजरों में हेरफेर कर करोड़ों के घोटाले का मामला हो, तो कभी मीटर रीडिंग से छेड़छाड़ का मामला। बीते दिनों निगम के अफसरों ने ऐसे सैकड़ों विद्युत मीटर पकड़े थे, जिनमें मीटर रीडरों ने उपभोक्ताओं से सांठगांठ कर करोड़ों रुपये की रीडिंग स्टोर कर दी थी।
शासन तक मामला पहुंचने के बाद निगम के अधिकारियों ने कड़ा कदम उठाते हुए कई रीडरों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी। आनन फानन में मीटर रीडरों ने स्टोर की गई रीडिंग को आगामी बिलों में एक साथ जोड़ दिया था। जिसके चलते उपभोक्ताओं के बिल बढ़कर आने लगे। इससे परेशान उपभोक्ता निगम कार्यालयों के चक्कर लगाने लगे। हालांकि इस तरह के मामलों से निगम की किरकिरी होते देख तकनीकी टीम ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। जिससे मीटर में रीडिंग घपले से निजात मिल जाएगी। जिले में काम करने वाली बिलिंग कंपनियों ने अपने रीडरों को नई तकनीक से जोड़ दिया है।
इस तरह जारी होंगे बिल
मीटर रीडर के मोबाइल फोन में एक लीड लगी होगी, जिसे मीटर से लिंक किया जाएगा। इसके बाद मीटर में तमाम रीडिंग, लोड आदि मोबाइल में दिखाई देंगे, यहीं से मीटर रीडर के पास मौजूद मशीन बिल जारी कर देगी। इस प्रक्रिया में मीटर रीडर को खुद रीडिंग नहीं भरनी पड़ेंगी।
रीडिंग में गड़बड़ी करते थे कुछ मीटर रीडर
अब से पहले मीटर रीडर मशीन में मैन्युअल रीडिंग स्टोर करते थे। ऐसे में उपभोक्ताओं से सांठगांठ होने पर मीटर की पूरी रीडिंग मशीन में न डालकर कुछ रीडिंग का ही बिल जारी कर दिया जाता था। जब मीटर में हजारों रीडिंग स्टोर हो जाती थी, तब मीटर को शातिर तरीके से बदल दिया जाता था। ऐसे में निगम को काफी नुकसान होता था।
अब एक क्लिक पर देख सकेंगे मीटरों की स्थिति
नई तकनीक से अधिकारी अब कार्यालयों में बैठकर ही किसी भी मीटर की स्थिति का जायजा ले सकेंगे। ऐसे में मीटर रीडर अब कोई घपला नहीं करेंगे। बिजली निगम का राजस्व भी बढ़ेगा और भ्रष्टाचार का कलंक भी कुछ कम हो जाएगा। अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि बिजली के बिल जारी करने की प्रणाली में बदलाव कर दिया गया है। अब मीटर में रीडिंग स्टोर कर बिल जारी नहीं किया जा सकेगा। मीटर संबंधी समस्त गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।