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हापुड़ः दुष्कर्म के बाद नाबालिग की हत्या के दो दोषियों को फांसी, एक आरोपी बरी

Fri, 16 Oct 2020 06:20 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
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दुष्कर्म का दोषी अंकुर... - फोटो : amar ujala
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करीब दो वर्ष पहले हापुड़ के चर्चित रहे फूलगढ़ी में नाबालिग से दुष्कर्म और उसके बाद उसकी हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश, विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) वीना नारायन ने दो आरोपियों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा का फैसला सुनाया वहीं दोनों पर कुल 37-37 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है जबकि एक अन्य दोषी को बरी कर दिया गया।

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विशेष लोक अभियोजक पोक्सो कोर्ट हरेंद्र त्यागी ने बताया कि हापुड़ देहात थाना क्षेत्र के अंतर्गत मोहल्ला फूलगढ़ी निवासी व्यक्ति ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके अनुसार पांच सितंबर 2018 की सुबह वह खेत पर गया हुआ था। जबकि उसकी पत्नी बड़े बेटे के साथ मायके गई थी। घर पर उसकी 12 वर्षीय पुत्री और दस वर्षीय पुत्र अकेले थे। दोपहर के समय उसके भतीजे ने सूचना दी कि उसका पुत्र लहूलुहान है और उसकी पुत्री लापता है।

घर पहुंचकर देखा तो घर में रखे आभूषण आदि भी गायब थे। तलाश करने पर उसकी पुत्री की लाश मकान के निचले हिस्से में स्थित भूसे के कमरे में बोरी में बंद अर्धनग्न हालत में मिली। इस मामले में डेयरी पर काम करने वाले दोनों नौकर अंकुर तेली पुत्र आसेराम निवासी मोहल्ला फूलगढ़ी और सोनू उर्फ पउआ उर्फ बीड़ी पुत्र गोपाल निवासी नवीम करीम को नामजद करते हुए दुष्कर्म और इसके बाद हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। जबकि एक सप्ताह बाद एक अन्य आरोपी अमरजीत उर्फ कलवा पुत्र राजपाल निवासी फूलगढ़ी का नाम प्रकाश में आने के बाद उसके खिलाफ भी संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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15 नवंबर 2018 को अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश/ विशेष न्यायाधीश पोक्सो वीना नारायन ने मुकदमे की सुनवाई शुरू की। बृहस्पतिवार को उन्होंने मामले में दोनों नौकरों अंकुर तेली और सोनू को दोषी माना और फांसी की सजा का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोनों दोषियों पर विभिन्न धाराओं में 37-37 हजार रुपये अर्थदंड देने, अर्थदंड की 80 प्रतिशत धनराशि मृतका के माता पिता को देने के आदेश दिए गए हैं।

जबकि तीसरे आरोपी अमरजीत को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। हरेंद्र त्यागी ने बताया कि मुकदमे में निर्णय आने तक संयुक्त निदेशक अभियोजक भूपेंद्र प्रताप सिंह एवं ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी धनंजय पांडेय ने भी पूरा सहयोग किया वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता केशव त्यागी ने भी वादी पक्ष की पैरवी की थी।

दोषियों को इन धाराओं में मिली सजा
- आईपीसी की धारा 307/120बी के अंतर्गत आजीवन कारावास तथा दस-दस हजार रुपये अर्थदंड।
- 201/120बी के अंतर्गत सात वर्ष साधारण कारावास तथा सात-सात हजार रुपये का अर्थदंड। अर्थदंड जमा न करने पर दो-दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास।
- 394/120बी के अंतर्गत आजीवन कारावास तथा सात-सात हजार रुपये का अर्थदंड।
-411/120बी के अंतर्गत तीन वर्ष का साधारण कारावास तथा दो-दो हजार रुपये अर्थदंड। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास।
- पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत आजीवन कारावास तथा दस-दस हजार रुपये अर्थदंड।
- आयुध अधिनियम की धारा 4/25 के अंतर्गत दो वर्ष का साधारण कारावास तथा एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड। अर्थदंड जमा न करने पर प्रत्येक अभियुक्त को एक-एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास ।
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- धारा 302 के तहत मृत्युदंड की सजा।

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