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कोरोना के साइड इफैक्टः छह महीने से न की सर्जरी, न देखे मरीज

Fri, 16 Oct 2020 06:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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कोरोना महामारी की वजह से देश की चिकित्सीय शिक्षा पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। बीते छह महीने में सर्जन ने एक ऑपरेशन तक नहीं किया है, जबकि मेडिसिन, आर्थो,

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न्यूरो जैसे विभागों में पढ़ रहे डॉक्टरों ने दूसरे मरीज तक नहीं देखे हैं। केवल कोरोना संक्रमित एक जैसे मरीजों का उपचार करने की वजह से उनकी शिक्षा पर संकट आ गया है। यूजी, पीजी और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की प्रैक्टिस तक रुक गई है। शैक्षणिक सत्र 2020-21 में आए एमबीबीएस के नए छात्रों को ऑनलाइन सिस्टम के जरिए मेडिकल का ककहरा भी नहीं पता है। सबसे ज्यादा परेशानी उन मेडिकल कॉलेजों में है, जहां के अस्पतालों को कोरोना विशेष किया गया है। मार्च के बाद से ही यहां संक्रमितों का उपचार चल रहा है।

एक ऐसा ही संस्थान है देश की राजधानी दिल्ली में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज है। दिल्ली एम्स के बाद रैंकिंग में दूसरे स्थान पर मौजूद इस कॉलेज में करीब एक हजार यूजी छात्र (तीनों वर्ष के) हैं, जबकि 500 के करीब पीजी छात्र हैं। 500 से 600 ही सीनियर रेजीडेंट हैं। यह सभी कॉलेज के अधीन लोकनायक अस्पताल में प्रैक्टिस करते हैं। आमतौर पर इस अस्पताल में रोजाना 9 हजार मरीज ओपीडी में आते थे, लेकिन कोविड विशेष घोषित होने के बाद यहां कोरोना मरीजों को ही लाया जा रहा है। छात्रों ने कॉलेज के डीन और अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर जल्द से जल्द अन्य मरीजों के लिए भी अस्पताल शुरू करने की मांग की है।
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दिल्ली में छह मेडिकल कॉलेज हैं, जहां 900 एमबीबीएस सीटें हैं। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के अलावा सफदरजंग, यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस, नार्थ दिल्ली मेडिकल कॉलेज, लेडी हार्डिंग और डॉ. आंबेडकर मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। इन सभी मेडिकल कॉलेजों में यूजी, पीजी और रेजीडेंट डॉक्टरों को प्रैक्टिल पढ़ाई में दिक्कत आ रही है। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में यह स्थिति और भी ज्यादा जटिल है।

हजारों का हो सकता है भविष्य बर्बाद
स्थिति यह है कि अब चिकित्सीय छात्रों को यह रट गया है कि कोविड मरीज को सुबह दोपहर और शाम को क्या-क्या उपचार देना है। छात्रों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक चली तो हजारों का भविष्य बर्बाद हो सकता है।

कई विभागों का बुरा हाल
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डॉ. केशव सिंह ने बताया कि उनके यहां छह महीने में प्रैक्टिल के नाम पर कुछ नहीं है। हड्डी रोग विभाग में तैनात डॉ. केशव ने मार्च के बाद से ही किसी मरीज का ऑपरेशन नहीं किया है। ठीक यही हालत मेडिसिन या अन्य विभाग के डॉक्टरों की है।

इन कॉलेजों में दिक्कत ज्यादा
महामारी से पहले और अब की तुलना में सभी चिकित्सीय छात्रों पर असर पड़ रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी उन्हीं छात्रों को आ रही है जिनके कॉलेज के अधीन अस्पताल को कोविड विशेष बनाया है। जैसे दिल्ली में एम्स और सफदरजंग अस्पताल में एक-एक ब्लॉक कोविड का है। जबकि अन्य मरीजों का उपचार भी चल रहा है लेकिन लोकनायक अस्पताल में पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ कोरोना का उपचार होता है।

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