खेतों पर सड़ रहा किसानों का सीताफल, बढ़ी परेशानी
हापुड़। लॉकडाउन के बाद बाजार भले ही खुलने लगे हों, लेकिन कोरोना महामारी की मार लोगों पर पड़ रही है। इन दिनों में सीताफल की खेती करने वाले किसानों को भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। सीताफल किसानों के खेतों पर सड़ रहा है। ऐसे में किसानों को काफी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
हापुड़ जिला किसान प्रधान जिला है। शहर के आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में सब्जी की खेती की जाती है। हापुड़ मंडी में सब्जी बेचकर किसान अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। लेकिन देश में कोरोना संकट से हर वर्ग की कमर तोड़ दी है। इससे जिले के किसान भी अछूते नहीं हैं। शहर के आसपास के गांव जोगीपुरा, दादरी, सरावा, असौड़ा, टियाला, बदनौली, ततारपुर, श्यामपुर, ददायरा, पटना मुरादपुर आदि गांवों में सीताफल (कद्दू) की खेती होती है। इस समय सीताफल की तुड़ाई हो रही है। किसानों के ये सीताफल हापुड़ और दिल्ली की मंडी में बिकते थे। सॉस बनाने वाली कंपनियां किसानों के सीताफल को तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल के औसत भाव से खरीदते थे।
लेकिन लॉकडाउन के बाद बाजारों में थोड़ी बहुत रौनक बढ़ी है। लेकिन मंडियों की स्थिति अभी भी खस्ता है। किसानों की सब्जियों को भाव नहीं मिल रहे हैं। तीन सौ रुपये क्विंटल बिकने वाला यही सीताफल करीब 70-75 रुपये क्विंटल बिक रहा है।
बोले किसान
- किसान कुंवर फुरकान, सत्यप्रकाश त्यागी, मोनू त्यागी, श्यामेंद्र चौधरी, अजमल आदि ने बताया कि आलम यह है कि किसानों को सीताफल के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि किसानों का सीताफल खेतों में पड़ा सड़ रहा है। इतना ही नहीं कुछ किसान तो अगली फसल बोने के लिए सीताफल को बिना तोड़े ही जुताई कर रहे हैं। ऐसी स्थिति रही तो किसानों को काफी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
इस संबंध में एसडीएम सत्यप्रकाश का कहना है कि लॉकडाउन खुलने के बाद धीरे-धीरे जिंदगी सामान्य हो रही है। सरकार ने मंडी शुल्क में भी कमी की है। इसके अलावा किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे।