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प्रदूषण को लेकर हुए एनजीटी ने कसी कोल्हुओं पर नकेल

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प्रदूषण को लेकर एनजीटी ने कसी कोल्हुओं पर नकेल
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नितिन दीक्षित
हापुड़। दिवाली के बाद से खस्ताहाल हुई प्रदूषण की हालत अब बारिश के बाद सुधरी है। यह स्थिति बरकरार रहे, इसके लिए एनजीटी ने कोल्हुओं के लिए नई गाइड लाइन जारी कर दी है। प्लॉस्टिक वेस्ट तो पहले ही वर्जित है, अब कोल्हू की चिमनी की ऊंचाई भी दस मीटर से अधिक होनी अनिवार्य कर दी गई है। इन नियमों का पालन कराने के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
दिवाली के बाद वातावरण में छाये प्रदूषण ने दिल्ली और एनसीआर में पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। हालात इतने भयावह थे कि कई दिन स्कूलों की भी छुट्टी करनी पड़ी थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक ने कड़ा रुख इख्तियार करते हुए सरकारों को फटकार लगायी थी। हालांकि तीन चार दिन पहले तेज हवाओं और ओलावृष्टि के साथ आयी बारिश ने वातावरण को पूरी तरह से साफ कर दिया था। फिलहाल वातावरण के हालात सामान्य हैं। लेकिन आने वाले दिनों में हालात न बिगड़े इसके लिए एनजीटी ने कोल्हुओं के लिए भी गाइड लाइन जारी कर दी है।
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एनजीटी द्वारा कोल्हुओं के लिए जारी आदेशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोल्हू में जलाने के लिए किसी भी प्रकार से रबर, यूज्ड टायर, प्लास्टिक वेस्ट आदि का प्रयोग न किया जाए। कोल्हू में जलाने के लिए केवल सूखी खोई, लकड़ी, कृषि अपशिष्ट ही प्रयोग किया जाए।
काल्हू की चिमनी कम से कम दस मीटर होनी चाहिए। इससे कम ऊंचाई की चिमनी मान्य नहीं होगी। जबकि सच्चाई यह है कि जिले में शायद ही कोई ऐसी कोल्हूू संचालित हो, जिसकी चिमनी की ऊंचाई तीन चार मीटर से अधिक हो। एसडीएम सत्यप्रकाश का इस संबंध में कहना है कि एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में क्षेत्र के कोल्हुओं का निरीक्षण कर उन्हें गाइड लाइन के हिसाब से ही संचालित कराया जाएगा।
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जिला गन्ना अधिकारी से मांगी कोल्हुओं की सूची-
एनजीटी का पत्र मिलने के बाद प्रशासन ने जिला गन्ना अधिकारी से जिले में संचालित कोल्हुओं की सूची मांगी है। पत्र में कहा गया है कि जिले के सभी संचालित कोल्हुओं के बारे में ब्योरा जुटा लिया जाए। ताकि इनका निरीक्षण किया जा सके।
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