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बागपत से आयी तीन टीमें करेंगी 336 स्वयं सहायता समूह का गठन

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बागपत से आयी तीन टीमें करेंगी 336 स्वयं सहायता समूह का गठन
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हापुड़। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए प्रदेश मेें जिला हापुड़ और जिले में ब्लॉक सिंभावली को सघन घोषित करते हुए 336 स्वयं सहायता समूहों के गठन का लक्ष्य रखा है। बागपत से आयी तीन टीमें इन समूहों के गठन के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दे रही हैं। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को आर्थिक सहायता मुहैया कराकर समूहों के गठन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
महिलाओं को सशक्त और स्वावलंबी बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा महिलाओं के समूहों का निर्माण कराने के साथ साथ उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता मुहैया करायी जाती है। हापुड़ जिले में फिलहाल इस प्रकार के 889 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। प्रत्येक समूह में कम से कम 10 और अधिक से अधिक 15 महिलाएं शामिल होकर तरह तरह के रोजगार कर रही हैं। मिशन के सर्वे में हापुड़ जिले को इस मामले में अभी भी सघन घोषित किया है, जबकि जिले में सिंभावली ब्लॉक को सघन चुना गया है। ऐेसे में वित्तीय वर्ष 2019-20 में जिले को 336 समूहों के गठन का लक्ष्य दिया है। बड़ी बात है कि इसके लिए बागपत के एनजीओ आईसीआरपी की तीन टीमों को इन समूहों के गठन की जिम्मेदारी दी है। फिलहाल तीनों टीमें सिंभावली ब्लॉक में सक्रिय होकर समूह के गठन के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं।
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प्रशिक्षण में महिलाएं दिखा रही दिलचस्पी
समूह के गठन से पहले टीमों द्वारा महिलाओं को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। टीमों अभी तक आलू चिप्स तैयार करने के लिए 22 महिलाओं, मशरूम की खेती के लिए 25 महिलाओं, ड्राइविंग सीखने के लिए 20 महिलाओं और सिलाई के लिए 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। खेतीबाड़ी करने वाली महिलाओं को मिट्टी की जांच से लेकर खेती के उन्नत तरीकों की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए महिलाएं काफी दिलचस्पी दिखा रही हैं। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कल्याण योजना के तहत समूह के बच्चों को उनकी क्षमताओं के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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जिला विकास अधिकारी संजय यादव ने बताया कि समूह की महिलाओं को सरकार 3.25 लाख का बिना ब्यॉज के ऋण मुहैया कराती है। समूह की महिलाओं को सरकारी अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों में कैंटीन संचालित करने के लिए वरीयता भी दी जाती है। पात्र महिलाएं समूहों के रूप में स्वावलंबी बन सकती हैं।
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