खादर के 15 गांवों के रास्तों में भरा पानी
गढ़मुक्तेश्वर। गढ़ क्षेत्र में फिलहाल गंगा का जलस्तर स्थिर बना हुआ है, लेकिन गंगा तट से सटे गांवों के रास्तों समेत घरों में पानी भरा हुआ है। करीब 15 गांवों के रास्ते जलमग्न होने के चलते अवरूद्ध हो चुके हैं। वहीं डीएम के निर्देश पर एसडीएम, डीपीआरओ समेत तहसीलदार ने गांवों में पहुंचकर निरीक्षण कर ग्रामीणों से वार्ता कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला बना हुआ है। बुधवार की शाम छह बजे तक गढ़-ब्रजघाट क्षेत्र में गंगा का जलस्तर 198.60 मीटर दर्ज किया गया है। वर्तमान में दो दिनों से जलस्तर स्थिर बना हुआ है। लेकिन क्षेत्र के गांव रामपुर न्यामतपुर, इनायतपुर, अब्दुल्लापुर, भगवंतपुर, मुकीमपुर, लठीरा, नयाबांस, नयागांव समेत 15 गांवों के जंगल में खड़ी फसल पूरी तरह जलमग्न हैं। इसके साथ ही लगभग सभी गांवों के रास्तों पर पानी भरा हुआ है। घरों के पास तक भी गंगा का पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ चुकी हैं। खेतों व जंगलों में पानी भरने से पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए चारे की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
55 हजार क्यूसेक पानी किया डिस्चार्ज
बाढ़ नियंत्रण कक्ष मेरठ के अनुसार बुधवार की शाम भी बिजनौर बैराज से 55 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया। जो बृहस्पतिवार की देर शाम तक गढ़ क्षेत्र में पहुंचेगा, लेकिन इससे जलस्तर पर विशेष असर नहीं पड़ेगा।
गढ़ खादर क्षेत्र में एसडीएम और डीपीआरओ ने किया निरीक्षण
बुधवार को डीएम अनुज सिंह के निर्देश पर एसडीएम विशाल यादव, डीपीआरओ, तहसीलदार विवेक भदौरिया ने गढ़ खादर क्षेत्र में निरीक्षण किया। इस दौरान जिला पशु विभाग के अधिकारी प्रमोद कुमार, एडीओ पंचायत भानेश्वर सिंह को दिशानिर्देश देते हुए कहा कि जिन गांवों में जलस्तर बढ़ा है, उन गांवों के पशुओं को टीकाकरण कराए जाए ताकि पशुओं में बीमारी न पनपे। वहीं, इस दौरान एसडीएम विशाल यादव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी गांवों में कैंप लगाने का निर्देश दिया। जिसके बाद उन्होंने गढ़ तहसील के राजस्व निरीक्षक और लेखपालों को भी ग्रामीणों से संपर्क बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
तहसीलदार विवेक भदौरिया ने कहा कि बिजनौर बैराज से फिलहाल कम पानी छोड़ा गया है, जिससे जलस्तर में जल्द ही गिरावट आएगी। इसलिए किसी भी ग्रामीणों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सभी गांवों में प्रशासनिक टीमों को अलर्ट किया हुआ है, जिससे ग्रामीण और अधिकारी संपर्क में रहे सके। वहीं, स्वास्थ्य व पशु चिकित्सा विभाग को गांवों में कैंप लगाने का निर्देश दिया गया है।