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शिक्षित बेटियों से ही होगी देश की तरक्की

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गढ़ नगर में स्थित क्रिस्तु ज्योति कॉनवेंट स्कूल में अपराजिता कार्यक्रम के बाद मुख्य अतिथि के सा? - फोटो : GARH
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शिक्षित बेटियों से ही होगी देश की तरक्की
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गढ़मुक्तेश्वर। छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ समाज के हितों से जुड़े कामों में भी भाग लें, जिससे उनका मानसिक विकास भी होगा। ये बातें एसडीएम विजयवर्धन तोमर ने कहीं। बुधवार को क्रिस्तु ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें वक्ताओं ने महिला सशक्तीकरण के लिए शिक्षा को सबसे प्रमुख बताया। वक्ताओं ने छात्राओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी। वहीं, छात्राओं ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को लेकर नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति भी की।
गढ़ में ठंडी सड़क पर स्थित क्रिस्तु ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसडीएम विजयवर्धन तोमर और विशिष्ट अतिथि कोतवाली प्रभारी निरीक्षक शीलेश कुमार ने कहा कि छात्राएं किसी भी अप्रिय बात पर चुप न रहें बल्कि उसके खिलाफ आवाज उठाएं। अपराजिता बनना है तो रूढ़िवादिता को त्यागकर हिम्मत और हौसले के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने छात्राओं को बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ समाज के हितों से जुड़े कामों में भाग लें, जिससे उनका मानसिक विकास भी होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रधानाचार्या सिस्टर साइयूजिया ने कहा कि जिस घर में नारी का सम्मान होता है, उस घर में देवी-देवताओं का वास होता है। संचालन कर रहे कवि राजकुमार हिंदुस्तानी ने कहा कि हम सभी को अपनी सोच बदलनी होगी। महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठानी होगी, जिससे उनको बढ़ावा न मिले।
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एसडीएम विजयवर्धन ने कहा कि समाज में जागरूकता लाने के लिए ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए। ग्रंथों में भी महिलाओं को पहला स्थान दिया है, वैसे ही समाज में भी महिलाओं को पहला स्थान मिलना चाहिए। विशिष्ट अतिथि कोतवाली प्रभारी शीलेश कुमार ने कहा कि जो किसी से न हारे, वह अपराजिता होती है। स्कूल-कॉलेजों में विद्यार्थियों को महिला सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। जिससे समाज में नई चेतना जगाई जा सकती है।
प्रधानाचार्या साइयूजिया ने कहा कि एक शिक्षित महिला कई परिवारों को शिक्षा से जोड़ने का काम करती है। वर्तमान में हर क्षेत्र में महिला अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही है। जो मां-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते हैं, उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए।
शिक्षिका सीमा शर्मा ने कहा कि लोग लड़कियों को कमजोर समझते हैं पर यह नहीं जानते कि जिम्मेदारी पड़ने पर बेटियां ऑटो रिक्शा से लेकर ट्रेन और प्लेन चलाने में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।
शिक्षिका प्रियंका शर्मा ने कहा कि सोच बदलेगी तभी समाज बदलेगा। महिला सशक्तीकरण के प्रयासों को और बल मिलना चाहिए। जिससे बेटियां जागरूक हो सकेंगी।
छात्रा अंशिका वशिष्ठ ने कहा कि बेझिझक बेटियों को अपने हक की लड़ाई लड़नी चाहिए। इसके लिए डर को भी मन से दूर करना होगा, तभी महिलाओं के प्रति अपराधों में कमी आएगी।
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छात्रा अनुष्का पुरुषोत्तम ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराध रोकने के लिए हमें अपने घरों से ही शुरुआत करनी होगी। बच्चों में संस्कार विकसित करने होंगे। शिक्षित बनकर सशक्त बनना होगा और अपने हक, सुरक्षा, सम्मान के प्रति जागरूक होना होगा।
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