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Hapur News: कर वसूली बढ़ाने के लिए प्रत्येक माह ईंट-भट्ठों पर दस्तक देगी जीएसटी टीम

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हापुड़। कर वसूली बढ़ाने के लिए जिले में संचालित लगभग 130 ईंट-भट्ठों की अब जीएसटी विभाग की टीम दस्तक देकर हर महीने जांच करेगी। सर्वे के दौरान प्रत्येक भट्ठे पर जाकर उत्पादन, विक्रय, ईंधन की खपत और कर भुगतान की स्थिति का ब्योरा एकत्र किया जाएगा। 50 हजार रुपये वार्षिक से कम कर अदा करने वाले ईंट भट्ठा संचालक विभाग के रडार पर हैं। हालांकि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष ईंट-भट्ठों से कर वसूली में बढ़ोतरी हुई है।
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राज्य कर विभाग के चार खंडों में 130 ईंट-भट्ठा पंजीकृत हैं, इनमें सबसे अधिक संख्या खंड तीन में है। कई भट्ठा संचालक बिना पंजीकरण या कर अदायगी के कारोबार करते हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। लेकिन अब विभाग का राजस्व बढ़ाने के लिए अधिकारी प्रत्येक माह भौतिक सत्यापन कर जांच करेंगे। सर्वे के दौरान प्रत्येक भट्ठे पर जाकर उत्पादन, विक्रय, ईंधन की खपत और कर भुगतान की स्थिति का ब्योरा एकत्र किया जाएगा।
राज्य कर विभाग टीम द्वारा बिक्री के बिलों व जीएसटी रिटर्न (जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-3B) का मिलान किया जाएगा। साथ ही कच्चे माल, श्रमिकों की संख्या, मजदूरी भुगतान और भट्ठे की वास्तविक संचालन स्थिति की पुष्टि जीपीएस और स्थल निरीक्षण से की जाएगी। दस्तावेजी अनुपालन के तहत रजिस्टर, ई-वे बिल और चालान की भी जांच की जाएगी। इन आधारों पर सही कर अदायगी का निर्धारण किया जाएगा। जिन भट्ठों में अनियमितता मिलेगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जीएसटी उपायुक्त लालचंद का कहना है कि कर चोरी की आशंका के चलते विभाग ने यह फैसला लिया है। प्रत्येक खंड के जीएसटी अधिकारी भट्टों से संबंधित सभी अभिलेखों की जांच करेंगे। वहां होने वाले उत्पाद, स्टॉक और बिक्री संबंधी जानकारी जुटाकर भट्ठा मालिकों को बकाया कर चुकाने के लिए जानकारी देंगे। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ा राजस्व
राज्य कर विभाग में पंजीकृत ईंट-भट्ठों से वित्तीय 2024-25 में दिसंबर तक 2.18 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर माह तक बढ़ोतरी के साथ 3.41 करोड़ रुपये पहुंच गया है। जिससे विभाग को करीब 1.22 करोड़ रुपये का अधिक कर प्राप्त हुआ है।



50 हजार रुपये से कम कर देने वाले रडार पर



ईंट भट्टा संचालकों द्वारा प्रत्येक वर्ष कारोबार तो किया जाता है, लेकिन उसका रिकॉर्ड न होने के कारण कर चोरी कर विभाग को चूना लगाते हैं। शासन के निर्देश पर 50 हजार रुपये वार्षिक कम कर चुकाने वाले ईंट-भट्ठा विभाग के रडार पर हैं। इसके साथ ही दो लाख रुपये प्रतिवर्ष से कम कर चुकाने वाले ईंट-भट्ठों की भी जांच की जा रही है। इससे विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी का अनुमान है।
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