केंद्र सरकार ने मनरेगा मजदूरों की मजदूरी में एक रुपये की बढ़ोत्तरी की है। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह बढ़ोत्तरी 13 रुपये थी। ऐसे में इस इस वृद्धि को ऊंट के मुंह में जीरा बताया जा रहा है।
जिले में लगभग 11700 मनरेगा मजदूर रजिस्टर्ड हैं। जिसमें लगभग 7600 कार्यरत हैं। शासन ने जारी आदेशों में एक अप्रैल से मनरेगा मजदूरों की मजदूरी में एक रुपया वृद्धि की घोषणा की है।
फिलहाल मनरेगा मजदूरों को प्रतिदिन 174 रुपये मजदूरी दी जा रही है। ऐेसे में एक रुपया बढ़ने से अब प्रतिदिन 175 रुपये मजदूरी इन मजदूरों को दी जाएगी। इस वित्तीय वर्ष में मात्र एक रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने 13 रुपये की वृद्धि की थी।
जानकार मानते हैं कि केंद्र सरकार की ओर से बढ़ायी मजदूरी काफी कम है। शहरी क्षेत्र में मजदूरी तीन सौ रुपये से अधिक है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी ढाई सौ रुपये की मजदूरी मिल रही है।
मजदूरी अधिक मिलने के चलते मनरेगा योजना से मजदूरों का मोह भंग हो रहा है। इसके चलते अब तक ब्लॉकों में मनरेगा के कार्यों की शुरूआत नहीं हो पाई है। परियोजना निदेशक प्रमोद सक्सेना ने बताया कि मनरेगा मजदूरी में एक रुपये की वृद्धि की गई है। जिसे एक अप्रैल से लागू कर दिया गया है।