मेरठ गढ़ रोड पर सड़क किनारे खड़े पेड़.
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हरियाली की कीमत पर वाहनों को रफ्तार
हापुड़। जिले में गंगा एक्सप्रेसवे 13802 वर्ग मीटर आरक्षित वन्य क्षेत्र से होकर गुजरेगा। वन विभाग द्वारा भूमि को एक्सप्रेसवे के लिए स्थानांतरित किया जा रहा है। गंगा एक्सप्रेस वे और गढ़ मेरठ हाईवे के चौड़ीकरण के लिए 1381 हरे पेड़ काटे जाएंगे। वन विभाग ने इसकी अनुमति भी दे दी है। हालांकि वन विभाग का दावा है कि एक्सप्रेसवे और हाईवे के निर्माण के बाद इनकी ग्रीन बेल्ट में पौधे रोपे जाएंगे।
गंगा एक्सप्रेसवे हापुड़ जिले के 29 गांवों से गुजरेगा। इसमें हापुड़ तहसील के सात और गढ़मुक्तेश्वर के 22 गांव शामिल हैं। जिले में गंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई 32 किलोमीटर होगी। एक्सप्रेसवे और गढ़ मेरठ हाईवे के चौड़ीकरण से वाहन तेज रफ्तार से चलेंगे। चालकों को वाहनों का माइलेज भी बेहतर मिलेगा और मेंटेेनेंस पर कम खर्च होगा। चिंता की बात यह है कि यह रफ्तार छायादार और फलदार हरे पेड़ोें की कीमत पर मिलेगी। गंगा एक्सप्रेसवे के लिए 329 विशाल छायादार पेड़ हैं और 480 छोटे पेड़ कटेंगे। उधर गढ़-मेरठ हाईवे के लिए 572 पेड़ काटे जाएंगे। जल्द ही वन निगम इन पेड़ों की कटान की प्रक्रिया शुरू करेगा। वहीं गंगा एक्सप्रेसवे की जद में 13802 वर्ग मीटर आरक्षित वन्य क्षेत्र भी आ रहा है। सर्वे में यह बात सामने आई है। इस भूमि को वन विभाग को एक्सप्रेस वे के लिए स्थानांतरित कर रहा है।
वन संरक्षक, गढमुक्तेश्वर : गंगा एक्सप्रेसवे और मेरठ हाईवे के लिए पेड़ काटने की अनुमति दे दी गई है। इन पेड़ों के बदले में दस गुना पौधे रोपे जाएंगे।