हापुड़ में ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नियम वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। वैध पीयूसीसी होने के बावजूद सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड अपडेट न होने से पंप कर्मचारी पेट्रोल देने से मना कर रहे हैं। इससे वाहन चालकों और कर्मचारियों में नोकझोंक हो रही है।
हापुड़ में पेट्रोल पंपों पर लागू किए गए ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नियम के बाद वाहन स्वामियों की परेशानी बढ़ गई है। कई वाहन चालकों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (पीयूसीसी) होने के बावजूद सॉफ्टवेयर एप में उसका रिकॉर्ड अपडेट नहीं है। ऐसे में पंप कर्मचारी प्रमाण-पत्र की हार्ड कॉपी को मान्य नहीं मान पा रहे हैं और वाहन में पेट्रोल डालने से मना कर रहे हैं।
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इस तकनीकी दिक्कत के कारण वाहन चालकों और कर्मचारियों में दिन में कई बार नोकझोंक हो रही है। शनिवार को शहर के कई पेट्रोल पंपों पर वाहन चालक पीयूसी प्रमाण-पत्र की हार्ड कॉपी लेकर भी पहुंचे। चालकों का कहना था कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रदूषण जांच कराकर प्रमाण-पत्र बनवाया है।
इसके बावजूद सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड नहीं दिखने के कारण उन्हें पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है। इससे वाहन चालकों को काफी देर तक पंप पर इंतजार करना पड़ा। यही हाल जिले के लगभग सभी पंपों पर है। वहीं, पंप संचालक पारितोष गर्ग का कहना है कि शासन के निर्देशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है। सॉफ्टवेयर में वैध पीयूसीसी का रिकॉर्ड नहीं आने पर कर्मचारी ईंधन देने को लेकर असमंजस में हैं।
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“सॉफ्टवेयर में कुछ तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें हैं। यदि किसी के पास हार्ड कॉपी है तो बाइक का पंजीकरण नंबर मिलाकर पेट्रोल देने के निर्देश दिए गए हैं।” - डॉ. सीमा सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
“मेरे पास प्रदूषण प्रमाण-पत्र मौजूद था, लेकिन पंप कर्मचारी सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड नहीं होने की बात कहकर पेट्रोल देने से मना करते रहे। बाद में बहुत मुश्किल से पेट्रोल मिला।” - कपिल, बाइक चालक
एक अन्य बाइक चालक ने कहा कि पीयूसी बनवाने के बाद भी यदि उसका रिकॉर्ड सॉफ्टवेयर पर अपडेट नहीं होगा तो वाहन स्वामी क्या करें। पेट्रोल पंप पर पहुंचने के बाद नियम की जानकारी होने से समय भी खराब हो रहा है और कर्मचारियों से बहस हो रही है।