भीषण सर्दी में भी भी डेंगू का कहर जारी है। तापमान गिरकर सात डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। इसके बावजूद पिछले तीन दिनों में डेंगू की चपेट में आए चार लोगों को यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इन पीड़ितों में पिलखुआ निवासी एक महिला और तीन लोग लालकुआं और साहिबाबाद के हैं। सर्दी में डेंगू के मरीजों के मिलने से विशेषज्ञ चिंतित हैं। इसको लोगों के रहन-सहन में आए बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि इस साल सबसे अधिक डेंगू के मरीजों की पुष्टि हुई है, जिसमें से 16 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग सिर्फ दो की मौत की ही पुष्टि कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार जब तापमान 25 डिग्री से नीचे जाने लगता है तब डेंगू की ब्रीडिंग रुक जाती है । इस समय तापमान अधिकतम 22 डिग्री और न्यूनतम सात डिग्री है फिर भी डेंगू के केस मिल रहे हैं। मच्छरों की बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता से स्वास्थ्य विभाग भी चिंतित है।
सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि यशोदा अस्पताल से डेंगू पीड़ितों की रिपोर्ट मिल गई है। जहां डेंगू के मरीज मिले हैं वहां दवा का छिड़काव कराया जाएगा। अस्पतालों में भी स्प्रे किया जाएगा। जहां तक हो मच्छरों से बचें और डेंगू के लक्षण दिखने पर चिकित्सक से परामर्श करें।
सर्दियों के मौसम में स्वाइन फ्लू फैलने की आशंका चिकित्सकों को सता रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इसको लेकर अलर्ट भी जारी कर दिया है। टेमीफ्लू कही दवाई का स्टाक भी किया जा रहा है। डेंगू की ओर से चिकित्सक निश्चिंत हो गए थे। स्वाइन फ्लू के सीजन में डेंगू के मरीज मिलने से विशेषज्ञ हैरान हैं।
संक्रामक रोग विशेषज्ञ डा. वीके द्विवेदी का कहना है कि डेंगू के मच्छर के काटने के सात से 15 दिन के बीच व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे में हो सकता है कि मच्छर काटने के दौरान तापमान इतना कम न हो और डेंगू का मच्छर उस समय सक्रिय हो।
पर्यावरण वैज्ञानिक डा. विवेकराज सिंह का कहना है कि 07/20 डिग्री तापमान पर डेंगू का मच्छर सक्रिय नहीं रह सकता है। हो सकता है जिन मकानों में रहने वालों को डेंगू हुआ है, वहां का सामान्य तापमान कुछ ज्यादा हो। कई मकानों में तापमान ज्यादा कम नहीं होता है। लोग रूम हीटर आदि लगाकर तापमान को मेंटेन करते हैं। ऐसे में लोगों की बदलती जीवनशैली में मच्छर भी पनपते रहते हैं।