रोडवेज बस में खस्ताहाल हुआ आपात कालीन द्वार। संवाद
हापुड़। रोडवेज बसों में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। डिपो की अनेक बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं हैं। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो बस में बैठे यात्रियों को प्राथमिक उपचार मिलना मुश्किल है। वहीं बसों की सीट और आपातकालीन खिड़की भी खस्ताहाल है। लेकिन परिवहन निगम के अधिकारी इस तरफ ध्यान तक नहीं दे रहे हैं।
हापुड़ डिपो से लखनऊ, बरेली, सीतापुर, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, किठौर, मोदीनगर सहित विभिन्न मार्गों पर 134 बसों का संचालन होता है। परिवहन निगम की ओर से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। जबकि वास्तविकता इससे अलग है। सवारियों से टिकट के रुपये वसूलकर परिवहन निगम केवल उनको गंतव्य तक पहुंचाने का काम कर रहा है।
यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। डिपो की रोडवेज बसों में लगे फर्स्ट एड बॉक्स या तो टूट चुके हैं या फिर गायब हैं। कुछ बसों में बॉक्स लगे दिख भी जाएं तो उनमें न तो मरहम पट्टी होती है और न ही जरूरत के लिए दवाइयां उपलब्ध हैं। ऐसे में यदि यात्रा के दौरान कोई हादसा हो जाता है और यात्रियों को प्राथमिक उपचार की आवश्यकता पड़ती है तो चालक और परिचालक के पास कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। बसों में आपातकालीन खिड़की भी जर्जर हालत में है। किसी बस में एक लॉक टूटा हुआ है तो किसी का शीशा गायब है। ऐसे में सफर के दौरान हादसे का खतरा भी बढ़ा हुआ है।
परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक लक्ष्मण सिंह का कहना है कि सभी चालक और परिचालकों के पास फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध कराए गए हैं। जिन बसों में मामूली खामियां हैं, उन्हें जल्द दुरुस्त करा दिया जाएगा।
रोडवेज बस में खस्ताहाल हुआ आपात कालीन द्वार। संवाद
रोडवेज बस में खस्ताहाल हुआ आपात कालीन द्वार। संवाद