हापुड़। ऊर्जा निगम के तीनों डिवीजन में 33 हजार किसानों के नलकूपों को मुफ्त बिजली के लिए केवाईसी नहीं हो रही है। इन किसानों के लेजर और बिल के खाते बिगड़े हुए हैं, जिनमें घोटाला किया गया था। पोर्टल पर दी शर्तें ऐसे किसान पूरी नहीं कर पा रहे, ऐसे में उन्हें बिल माफी नहीं मिल रही है। साथ ही जिन किसानों की मौत हुई है, उनके कनेक्शन भी मुफ्त बिजली से फिलहाल बाहर हैं।
प्रदेश में भाजपा की सरकार आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नलकूपों की बिजली 50 फीसदी माफ कर दी थी। किसानों से प्रति हॉर्स पावर 85 रुपये का बिल वसूला जा रहा था। हालांकि बजट में घोषणा के अनुसार अब सरकार ने मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। लेकिन इसमें कई महत्वपूर्ण शर्तें भी रखी हैं, जिन्हें पूरा कर पाना किसानों के लिए मुश्किल है।
ऑनलाइन पंजीकरण के लिए सबसे पहले किसानों का मार्च 2023 तक का बिल जमा होना चाहिए। जबकि करीब 33 हजार किसान ऐसे हैं, जिनमें बिलों में लाखों की गलत बकायेदारी जुड़कर आ रही है। इन किसानों को ओटीएस की छूट तो ऑनलाइन मिल नहीं पाती, ऐसे में केवाईसी दूर की बात है।
बहरहाल, जिले के 33 हजार किसान छूट की योजना से फिलहाल बाहर ही हैं। पोर्टल पर हापुड़ के लिए कोई विशेष विकल्प होने पर ही किसानों को इस योजना का लाभ मिल पाएगा। यही कारण है कि अभी तक रजिस्ट्रेशन करने वाले किसानों की संख्या 100 का आंकड़ा भी नहीं छू सकी है।
एक हजार करोड़ के पार पहुंची नलकूप किसानों की बकायेदारी
किसानों से बिल का पैसा वसूलकर उसे राजस्व कोष में जमा नहीं करने और रसीदों को नाले में बहाकर करोड़ों का घोटाला वर्ष 2004 के आस-पास किया गया था। चक्रवर्ती ब्याज के साथ बकायेदारी बढ़ रही है, यही कारण है कि अब इस घोटाले की राशि एक हजार करोड़ के पार पहुंच गई है। 20 सालों से मामले की जांच चल रही है, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका है।
मुफ्त बिजली के लिए रखी हैं ये शर्तें
-नलकूप पर मीटर लगा होना अनिवार्य।
-मार्च 2023 तक का बिल जमा होना जरूरी।
-1043 यूनिट तक ही फ्री बिजली, इसके बाद देना होगा बिल।
-बकाया राशि चुकाने के लिए किस्तों में पैसा जमा करने की सुविधा।
-उच्चाधिकारियों को कराया अवगत-
किसानों की समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। जल्द ही किसानों की केवाईसी हो सकेगी। आदेश के अनुसार किसानों को नलकूप के बिलों में छूट दी जाएगी।अवनीश कुमार, अधीक्षण अभियंता।