रोडवेज की बसों से डीजल चोरी रोकने के लिए प्रशासन नई योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए रोडवेज प्रशासन ने इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी) के साथ मिलकर एक डिवाइस तैयार किया है। यह डिवाइस तेल की प्रत्येक बूंद का हिसाब रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगा।
प्रदेश के सड़क परिवहन निगम में डीजल की सबसे अधिक खपत होती है। इंडियन आयल ने रोडवेज बस डिपो में डीजल पंप लगा रखे हैं। जहां से रोडवेज और अनुबंधित बसों में डीजल भरा जाता है।
इन पंपों पर डीजल चोरी का खेल होता है, जिससे घाटा बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में डीजल पंप पर कर्मचारी तैनात होते हैं, जो रजिस्टर में किस बस में कितना डीजल भरा गया, इसे दर्ज करते हैं।
कुछ चालक व परिचालक रास्ते में डीजल निकालकर बेच देते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए रोडवेज और इंडियन आयल कारपोरेशन ने मिलकर नया डिवाइस तैयार किया है, जो डीजल चोरी होने की जानकारी देगा।
डिवाइस को नोजल और बस की टंकी में लगाया जाएगा। टंकी में लगा डिवाइस बस के स्पीडोमीटर से जुड़ा होगा। सिस्टम रोडवेज के कंप्यूटर से जुड़ा होगा। डीजल भरने के लिए पंप के नोजल को टंकी में लगाते ही कंप्यूटर पर बस नंबर, टंकी में कितना तेल भरा हुआ है, पिछली बार कितना तेल भरा गया था, बस कितने किलोमीटर चली आदि की जानकारी आ जाएगी।
इसके बाद कार्यालय में तैनात कर्मचारी कंप्यूटर में कितना डीजल भरना है, फीड करेगा और नोजल स्वत: डीजल भर देगा। सिस्टम बस के चलने व डीजल की खपत के आधार पर बता देगा कि बीच रास्ते में कितना डीजल निकला है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक एनपी सिंह का कहना है इस तरह की योजना बनाई जा रही है। इस योजना के लागू होने से अवश्य ही लाभ होगा। फिलहाल बसों में इस तरह की चिप नहीं है।