बुखार से रविवार को वृद्धा और दुधमुंहे बच्चे समेत आठ की मौत हो गई। बुखार से क्षेत्र में हाहाकार मचा है। अस्पतालों में मरीजों को बेड तक नहीं मिल रहे हैं। सामान्य दवाएं तक मरीजों को उपलब्ध नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से बुखार के रोगियों को प्राथमिक चिकित्सा तक उपलब्ध नहीं है। एक दिन में आठ की मौत से हड़कंप मच गया है।
मरने वालों में डेंगू और चिकनगुनिया की पुष्टि हो चुकी है।हापुड़ के गांव आरिफपुर निवासी देवेंद्र कुमार की पत्नी शशि कई दिन से बुखार से पीड़ित थी। एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों ने मृतका में चिकन गुनिया का अंदेशा जताया है। वहीं नूरपुर निवासी वृद्धा रामवती की मौत हो गई।
उसके पुत्रों ने चिकन गुनिया का अंदेशा जताया है। बहादुरगढ़ में हेमराज के तीन माह के बेटे सौरभ को चार दिन पहले बुखार आया था। उसका स्थानीय चिकित्सालय में उपचार चल रहा था। रविवार सुबह बच्चे की मौत हो गई। बहादुरगढ़ में ही प्रकाश के बेटे बंटी (23) को एक सप्ताह से बुखार था। बंटी का डेहरा कुटी के चिकित्सक से इलाज चल रहा था।
रविवार सुबह बंटी की मौत हो गई। वह हलवाई का काम करता था। वहीं, बहादुरगढ़ क्षेत्र के ही जखैड़ा रहमतपुर के पूरन सिंह (65) की बुखार से रविवार तड़के मौत हो गई। उन्हें डेढ़ सप्ताह पहले से बुखार था। इसके अलावा, गढ़ के हशूपुर गांव में बुजुर्ग मजदूर सद्दीक खां की शनिवार देर रात मौत हो गई। सद्दीक को दस दिन से बुखार था।
तीन पहले उसे मेरठ के निजी चिकित्सक के भर्ती कराया गया था। गढ़-चौपला निवासी हाजी मरगूब खां (65) को दो सप्ताह पहले बुखार होने पर मेरठ के नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। आराम नहीं मिलने पर उन्हें चिकित्सकों ने दिल्ली रेफर कर दिया, वहां शनिवार देर रात उनकी मौत हो गई।
भतीजे मुस्तफा सईद ने बताया कि दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में जांच के दौरान चिकनगुनिया की पुष्टि हुई थी। बहादुरगढ़ क्षेत्र के भद्स्याना निवासी राकेश वर्मा की पत्नी हंसा देवी (65) को पांच दिन पहले बुखार आया था। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने मेरठ के नर्सिंग होम में भर्ती कराया, जहां शनिवार देर रात उनकी मौत हो गई।
मेरठ में पैथ रिपोर्ट में उनको डे़ंगू की पुष्टि हो गई थी। एक दिन में आठ लोगों की मौत से जहां क्षेत्र में हड़कंप मचा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग लंबी तानकर सो रहा है। लोगों को निजी और सरकारी अस्पतालों में कहीं पर भी बेड नहीं मिल पा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता और बचाव के लिए न तो अभियान चलाया गया है और न ही लोगोें को सामान्य दवाइयां मिल पा रही है।
चिकनगुनिया के मुख्य लक्षण
- हाथ-पैरों समेत जोड़ों में तीव्र दर्द होना।
- बुखार का 105 डिग्री से भी ऊपर पहुंचना।
- पेट में दर्द के साथ जी मिचलाना और उल्टी लगना।
- शरीर पर दाने अथवा लाल रंग के चकत्ते पड़ना
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सीएमओ डा. एके सिंह का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज न होने से चिकनगुनिया और डेंगू से मौत के विषय में सूचना नहीं मिल पाई है। हालांकि, अब विभागीय टीम भेजकर मेडिकल जांच और रोगियों को दी गई दवाओं के आधार पर मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। लोगों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है।
अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त भंडार भेज दिया है।
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दर्जनों लोग है बुखार की चपेट में
गांव हशूपुर में बुखार के मरीजों की तादाद सौ पार कर गई है। समाजसेवी कविंद्र चौधरी ने बताया कि गांव में सोफिया, नईम, सोनम, प्रेमसिंह, जितेंद्र, रेखा, सुनील, शिवपाली, सतीश, वर्षा समेत सौ से अधिक महिला-बच्चे बीमार हैं। वहीं, जखैड़ा रहमतपुर में बरखा, अश्वनी, प्रिंस, निशा, अरुण, राजपाल, विवेक, अमित, जयवीर, प्रकाश, हनीफ, रफीक समेत डेढ़ दर्जन से भी अधिक महिला-बच्चे बुखार की गिरफ्त में हैं।
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बजरंग दल ने सांसद से दवा बंटवाने की मांग की
धर्म प्रसार प्रचार प्रमुख महेश आर्य के नेतृत्व में बजरंग दल कार्यकर्ता अशोक आर्य, प्रवीण शर्मा, गुरवचन सिंह, संजीव शर्मा, सुनील सैनी, प्रदीप लोधी ने क्षेत्रीय सांसद कंवर सिंह तंवर को गढ़ क्षेत्र में फैल रहे बुखार के प्रकोप से अवगत कराया। साथ ही क्षेत्र में मरीजों का परीक्षण और दवाओं का वितरण कराने की मांग की।
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