सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से शवों को पोस्टमार्टम आदि के लिए भेजने को शासन से स्वास्थ्य विभाग को लाखों रुपये का वातानुकूलित शव वाहन मिला था, लेकिन बीते छह महीने से यह सीएमओ कार्यालय की शोभा बढ़ा रहा है।
हद यह है कि कर्मियों ने वाहन पर लिखे शव शब्द पर सफेद पट्टी चिपका कर उसे परिवहन वाहन बना दिया है। ऐसे में जरूरतमंद शव ले जाने को भटकते रहते हैं। जिले में स्वास्थ्य विभाग का पोस्टमार्टम हाउस बनकर तैयार हो चुका है,
लेकिन उसमें फिलहाल पोस्टमार्टम नहीं हो रहे हैं। ऐसे में शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरस्वती मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ता है। दुर्घटना आदि में मृत्यु होने पर शवों को हापुड़ सीएचसी लाया जाता है, वहां से पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाता है।
परिजनों को दुख की इस घड़ी में परेशानी न हो, इसके लिए शासन ने वातानुकूलित शव वाहन स्वास्थ्य विभाग को सौंपा था, लेकिन बीते छह माह में शायद ही यह वाहन कभी सीएमओ कार्यालय परिसर से निकला हो।
जब भी जरूरतमंद इसके लिए डिमांड करते हैं तो स्वास्थ्य कर्मी उन्हें टरका देते हैं। ऐसे में लोगों को निजी वाहन कर शव को ले जाना पड़ता है। परेशानी से बचने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने वाहन पर लिखे शव शब्द को ही सफेद पट्टी से ढंक दिया।
अब यह वाहन महज परिवहन वाहन है। ऐसे में अब लोग इसकी डिमांड भी नहीं करते हैं। सीएमओ कार्यालय के बाहर पड़ा यह वाहन धीरे-धीरे कंडम में तब्दील हो रहा है, लेकिन अब तक अधिकारियों की इस पर नजर नहीं पड़ी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके सिंह ने बताया कि ड्राइवरों की किल्लत के चलते वाहन का प्रयोग नहीं हो पा रहा है। वाहन पर चिट लगाने के मामले में वह जांच कराएंगे।