हापुड़। आलू और गेहूं की बुवाई शुरू होते ही जिले में डीएपी और यूरिया की डिमांड दोगुना तक बढ़ गई है। मांग को देखते हुए जिले के लिए एक मालगाड़ी डीएपी की रैक उड़ीसा से आवंटित हो गई है, जो संभवत बुधवार तक हापुड़ पहुंच जाएगी। जिला कृषि अधिकारी ने समितियों का निरीक्षण कर, स्टॉक परखा।
आलू, गेहूं की बुवाई के दौरान आस पास के जिलों में डीएपी का संकट पैदा हो गया है। हापुड़ की समस्त समिति और नकद बिक्री केंद्रों पर भी डीएपी का स्टॉक ज्यादा नहीं बचा है। हालांकि पूर्ति आसानी से हो सके, इसके लिए बफर गोदाम में 1500 टन डीएपी का स्टॉक सुरक्षित है।
डीएपी व यूरिया के संतुलित मात्रा में प्रयोग को लेकर अब कृषि विभाग ने जोत और फसलों क संस्तुति पर ही उर्वरक देने का निर्णय लिया है। औसतन एक एकड़ पर अधिकतम दो कट्टे और एक हेक्टेयर पर पांच कट्टे दिए जाएंगे। हालांकि फसल की संस्तुति के दौरान यदि अधिक डीएपी की जरूरत होती है तो किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। उधर, कॉओपरेटिव की सहकारी समितियों पर भी डीएपी, यूरिया की व्यवस्था कराई गई है। बफर गोदाम में रखे स्टॉक का भी सत्यापन किया गया है। सोमवार को जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार ने खाद समितियों का औचक निरीक्षण किया। पीओएस मशीन से उर्वरकों के वितरण और स्टोर रूम में खाद की उपलब्धता की जांच की। वहीं, डीएपी की पूर्ति पर्याप्त रखने के लिए बुधवार तक जिले को डीएपी की एक रैक (1560 टन) मिल जाएगी।
-किसानों को नहीं होगी उर्वरकों की कमी-
जिले में यूरिया का 9 हजार टन और डीएपी का डेढ़ हजार टन स्टॉक है। सभी खाद केंद्रों पर उर्वरक उपलब्ध हैं, उड़ीसा से डीएपी की रैक बुधवार तक मिल जाएगी।मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी।