गैंगरेप के बाद दलित किशोरी की हत्या करने वालों का सात माह बीतने के बाद बाद भी सुराग तक नहीं लग पाया है। हालांकि अब पुलिस ने तीन संदिग्ध युवकों के डीएनए सैंपल जांच को प्रयोगशाला में भिजवाए हैं।
बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर में दलित मजदूर की दस वर्षीय बेटी गांव के ही सरकारी स्कूल में कक्षा तीन की पढ़ाई करती थी। 22 अक्तूबर 2016 की दोपहर में वह पास के जंगल में बकरी चराने गई थी।
देर शाम को बकरियों के आने के बाद भी बच्ची घर नहीं लौट पाई थी। परिजनों के की खोजबीन करने पर उसका अर्द्धनग्न शव चित्तौड़ा जाने वाले रास्ते किनारे खड़ी झाड़ियों में पड़ा मिला था। उसकी गर्दन में उसी की सलवार का फंदा लगा हुआ था।
बकरी चराने के दौरान अगवा की गई बच्ची की उसी के कपड़ों से हत्या करने से पहले उसके साथ गैंगरेप किया गया था। इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई थी।
इस मामले में बच्ची के परिजनों समेत दलित समाज के लोगों ने आरोपियों पर कार्रवाई करने के लिए थाना और तहसील समेत जिला मुख्यालय का कई बार घेराव भी कर चुके हैं।
इस पर एसपी ने जनपद के तेज तर्रार सीओ और थाना इंचार्ज समेत क्राइम ब्रांच, इंटेलीजेंस, सर्विलांस, स्वाट की संयुक्त टीम गठित की थी। लेकिन सात माह की लंबी अवधि बीतने के बाद भी पुलिस आरोपियों की तलाश नहीं कर पाई है।
एसओ विनय कुमार आजाद का कहना है कि पोस्टमार्टम के दौरान बच्ची के डीएनए सैंपल लिए गए थे। इनके मिलान के लिए गांव के तीन नव युवकों के डीएनए सैंपल प्रयोगशाला भिजवाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर तीनों युवकों में कोई भी बच्ची के साथ हुई घटना में शामिल रहा होगा, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।