नाक के नीचे तमंचों से लेकर बम बनाने का गोरखधंधा होने के बाद भी पुलिस-प्रशासन समेत खुफिया महकमे को कोई भनक तक नहीं लग पाई। वहीं बारूद बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान की बिक्री और खरीददारी करने वालों की भी कोई जांच नहीं की जाती है।
गढ़ क्षेत्र में लाखों लोगों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही खाकी और खुफिया विभाग अपने दायित्व के प्रति कितने सजग हैं, इसका खुलासा एक बार फिर रविवार सुबह बहादुरगढ़ क्षेत्र के पसवाड़ा गांव में बम बनाने के दौरान हुई विस्फोट की घटना ने कर दिया है।
अति संवेदनशील बहादुरगढ़ क्षेत्र से जुड़े मिलीजुली आबादी वाले गांव पसवाड़ा में देसी बम बनाने का गोरखधंधा न जाने कब से होता आ रहा था, लेकिन पुलिस समेत खुफिया महकमे को इसकी आज तक कोई भनक तक नहीं लग पाई।
वहीं 27 मार्च की रात को महज सौ गज जमीन के टुकड़े पर कब्जे को लेकर क्षेत्र के गांव करीमपुर में किसान धम्मन सिंह को गोली मारकर घायल कर दिया गया था, जिसमें अगले ही दिन पकड़े गए तीन आरोपियों ने अपने कब्जे से दो तमंचों समेत कई जीवित कारतूस बरामद होने पर गांव के करीब हर एक घर में तमंचा होने की बात कबूली थी।
इस सबके अलावा तबाही मचाने वाला बारूद तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली गंधक-पोटाश की बिक्री और उसे खरीदने वालों पर भी पुलिस-प्रशासन कोई नजर नहीं रखता है। इससे लाइसेंस धारकों के अलावा भी लोग आसानी के साथ गंधक पोटाश की खरीद कर लेते हैं।
दमकल स्टेशन इंचार्ज नेपाल सिंह का कहना है कि गढ़ क्षेत्र में सिर्फ भैना में एक व्यक्ति के पास आतिशबाजी बनाने का लाइसेंस है, जिसके अलावा कोई भी दूसरा आदमी अगर गंधक पोटाश की खरीद करता है, तो वह पूरी तरह अवैध है। इसलिए लाइसेंस के बिना गंधक पोटाश बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करवाई जाएगी।