अयोध्या के एक अधिवक्ता के पुत्र को नोएडा से बुलाकर पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई।
साथ ही 1.10 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया। इस मामले में दो आरोपियों को बरी कर दिया गया। अर्थदंड की 80 प्रतिशत धनराशि मृतक के पिता को दी जाएगी।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश तोमर ने बताया कि फैजाबाद के अयोध्या के बैरागपुरा खाकी अखाड़ा की नई कालोनी निवासी वेदप्रकाश ओझा अधिवक्ता हैं।
उनका पुत्र कुलभूषण ओझा नोएडा की एक कंपनी में नौकरी करता था। उसकी सगाई लखनऊ की ज्योति तिवारी से 29 नवंबर 2011 को हुई थी। शादी 25 अप्रैल 2012 को होनी थी।
ज्योति तिवारी ने लखनऊ के आलमबाग निवासी राजीव रतन मोहन अवस्थी से कोर्ट मैरिज कर रखी थी। इसकी जानकारी कुलभूषण के परिजनों को नहीं थी।
उन्होंने बताया कि 27 मार्च 2012 को कुलभूषण नोएडा में अपनी कंपनी में गया था। उसका शव 28 मार्च को पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के गांव रघुनाथपुर के जंगल में बरामद हुआ था।
इस मामले में मृतक के पिता ने ज्योति तिवारी समेत चार लोगों के खिलाफ पिलखुवा कोतवाली में मामला दर्ज कराया था।
पुलिस की छानबीन में पता चला कि कुलभूषण को नोएडा से राजीव रतन मोहन अवस्थी, राहुल कुमार और बिजेंद्र बहादुर उर्फ सोनू कार में डालकर यह कहकर लाया था कि वह ज्योति का मामा है और उससे बात करना चाहता है।
पिलखुवा के पास राजीव रतन ने जैक मारकर कुलभूषण ओझा की हत्या कर दी और शव रघुनाथपुर के जंगल में फेंक दिया था।
बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार त्यागी ने राजीव रतन मोहन अवस्थी को दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास और 1.10 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
जबकि राहुल कुमार और बिजेंद्र बहादुर उर्फ सोनू को बरी कर दिया। अर्थदंड की 80 प्रतिशत धनराशि मृतक के पिता को दी जायेगी।
फैसला आने से पूर्व आरोपी राजीव रतन मोहन अवस्थी जमानत पर था और अब उसे जेल भेज दिया गया है। वहीं, ज्योति तिवारी फरार है।