प्राचीन चंडी मंदिर के दानपात्र से निकले 8 लाख रुपये गायब हो गए। इसको लेकर प्रबंध समिति में घमासान मचा है। समिति के एक पूर्व प्रधान ने डीएम को पत्र लिखकर रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने समिति के तीन पदाधिकारियों पर रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। जबकि मौजूदा प्रधान का कहना है कि मंदिर रिकार्ड में सब कुछ सही है।
प्रबंध समिति के पूर्व प्रधान नरेंद्र अग्रवाल ने डीएम को लिखे पत्र में कहा है कि चंडी मंदिर की गुल्लक महीने में एक बार खुलती है। उसमें निकले रुपयों की समिति पदाधिकारियों के सामने गणना होती है। इसमें औसतन चार लाख रुपये निकलते हैं। तीन फरवरी 2017 को मंदिर की गुल्लक खुलने पर दो पदाधिकारी 2.50 लाख रुपये यह कहकर ले गए थे कि पूरा रुपया दिखलाने पर आयकर देना पड़ेगा। इसी तरह 20 मार्च को गुल्लक खुली तो फिर एक पदाधिकारी 2.50 लाख रुपये ले गया।
तीसरी बार 25 अप्रैल को गुल्लक खुली तो तीन लाख रुपये हड़प लिए। इनमें से एक पदाधिकारी 2.50 लाख रुपये जबकि दूसरा पदाधिकारी 50 हजार रुपये ले गया। उक्त पदाधिकारी पर दो लाख रुपये दुकान का किरायानामा बदलने के पहले ही आ चुके थे। इस तरह दोनों पदाधिकारियों पर पांच पांच लाख रुपये पहुंच गये थे। बाद में मंदिर की दुकान के किरायेदार का नाम बदलने के चार लाख रुपये और आ गए।
इस तरह कुल 14 लाख रुपये का मामला तूल पकड़ गया। आश्चर्य की बात यह है कि यह सब समिति के आडिटर धर्मेन्द्र शर्मा के सामने हुआ जिन्होंने यह बात प्रबंध समिति की बैठक में कही है। वह यही मानते रहे कि ये लोग आयकर बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
इस मामले को लेकर प्रबंध समिति की बैठक 23 मई को हुई, जिसमें पदाधिकारियों और सदस्यों समेत 14 पदाधिकारी मौजूद थे। जिसमें इस मुद्दे को उठाया गया। इस संबंध में वर्तमान प्रधान चेतन प्रकाश अग्रवाल का कहना है कि मंदिर की एक दुकान के किरायेदार का नाम बदलने के लिए 6.60 लाख रुपये आए थे। उसकी गुप्त दान की रसीद काटकर बैंक में जमा कर दिये गये हैं। बाकी 8 लाख रुपये के आरोप निराधार हैं। रिकार्ड में सब कुछ सही है।