कानपुर के एक दलित छात्र ने जिले के एक इंजीनियरिंग कालेज में एडमिशन के लिए रुपये जमा कराए। लेकिन जब छात्र को कालेज का वातावरण पसंद नहीं आया तो उसने अपने रुपये वापस मांगे।
कालेज प्रशासन ने रुपये देने से इंकार करते हुए छात्र से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता की। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने एक माह के भीतर कालेज प्रशासन को रुपये वापस करने के आदेश दिए हैं।
कानपुर के देहली सुजानपुर के केडीए कालोनी निवासी अभिनव सोनकर ने वर्ष 2009 में पिलखुवा स्थित राजकुमार गोयल इंजीनियरिंग कालेज में प्रवेश के लिए 83500 रुपये जमा कर रसीद प्राप्त कर ली थी।
लेकिन छात्र को कालेज का वातावरण पसंद नहीं आया। इस पर छात्र ने कालेज प्रशासन से अपने रुपयों की मांग की। हालांकि कालेज प्रशासन ने 16550 रुपये का भुगतान तो कर दिया था। लेकिन 67 हजार रुपये का भुगतान कई बार मांगने पर भी नहीं किया गया।
छात्र ने रुपये वापस दिलाने के लिए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में शिकायत की थी। गुरुवार को को फोरम के अध्यक्ष आरपी सिंह, महिला सदस्य रेशमा यादव और सामान्य सदस्य नीरज ने आदेश दिया है कि वादी को 66 हजार रुपये बची हुई धनराशि और परिवाद व्यय के दो हजार रुपये एक माह के भीतर दिया जाए।
ऐसा नहीं करने पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज पाने का वादी अधिकारी होगा।